क्या कब्जे की लड़ाई के कारण हुई बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव की हत्या! आरोपी ने दिन-रात दिया था दरवेश का साथ

चैतन्य भारत न्यूज

लखनऊ. उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की पहली महिला अध्यक्ष चुनी गईं दरवेश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। दरवेश की हत्या उन्हीं के पूर्व सहयोगी अधिवक्ता मनीष शर्मा ने की। घटना उस वक्त की है जब दरवेश अध्यक्ष बनने पर स्वागत समारोह के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार मिश्रा के चैंबर में बैठी थीं।

बुधवार को मनीष ने दरवेश पर गोलियां चलाईं। इसके बाद उन्होंने खुद को भी सिर में गोली मार ली। घटना के बाद दरवेश को पुष्पांजलि अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं मनीष को गंभीर हालत में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस को जांच में पता चला कि आरोपी ने पहली गोली दरवेश के रिश्तेदार मनोज यादव पर चलाई थी। लेकिन मनोज नीचे की तरफ झुककर किसी तरह बच गया। फिर मनीष ने दो गोली दरवेश पर दाग दी। एक गोली दरवेश के सीने में लगी और दूसरी पेट में। अंत में मनीष ने चौथी गोली खुद को मार ली। इस पूरी वारदात के बाद पुलिस के लिए यही सवाल चुनौती बने हुए हैं कि आखिर मनीष ने मनोज और दरवेश पर गोली क्यों चलाई? क्या उन दोनों के बीच कोई विवाद था या पुरानी दुश्मनी थी? फिलहाल पुलिस हत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

बता दें रविवार को ही प्रयागराज में आगरा की रहने वाली दरवेश और वाराणसी के रहने वाले हरिशंकर सिंह को यूपी बार काउंसिल के अध्यक्ष के तौर पर संयुक्त रूप से चुना गया। हरिशंकर व दरवेश को 12-12 बराबर वोट मिले। बराबर मत के आधार पर दोनों को छह-छह महीने के लिए चयनित किया गया। सभी की सहमति के आधार पर दरवेश पहले छह महीने और हरिशंकर सिंह को शेष छह महीने के लिए अध्यक्ष रहना था।

चैंबर में जाने से पहले लोड की थी पिस्टल

वारदात के चश्मदीद वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद मिश्रा ने बताया कि, कुछ समय पहले ही दरवेश और मनीष की दोस्ती में दरार आ गई थी। लेकिन यह मामला इतना ज्यादा बढ़ जाएगा इस बारे में उन्हें अंदाजा भी नहीं था। घटना के वक्त पूरा चैंबर लोगों से भरा हुआ था। मनीष ने अरविंद के चैंबर में जाने से पहले ही अपनी पिस्टल लोड कर ली थी। चश्मदीदों ने बताया कि, अरविंद के चैंबर में जाकर मनीष तेज आवाज में बोलने लगा। फिर दरवेश ने उसे टोका और समझाने की कोशिश की। दरवेश के साथ ही मनोज ने भी मनीष को टोक दिया। यह देख मनीष अपना आपा खो बैठा और उसने मनोज और दरवेश पर गोलियां चला दी।

हर चुनाव में दरवेश का मददगार था मनीष

बता दें 2004 में वकालत शुरू करने के बाद मनीष और दरवेश दोस्त बने थे। 2011 में जब दरवेश ने पहली बार काउंसिल का चुनाव लड़ा था उस वक्त मनीष ने रात-दिन उनके लिए मेहनत की थी। इसके बाद से ही हर चुनाव में मनीष दरवेश के लिए प्रचार करता रहा।

अन्य वकीलों ने किया मनीष को फोन

चुनाव जीतने के बाद दरवेश का आगरा की दीवानी कचहरी में स्वागत समारोह था। लेकिन मनीष को इस बारे में पता नहीं था। उस कार्यक्रम में भी मनीष मौजूद नहीं था इसलिए कुछ वकीलों ने मनीष को फोन किया और वहां समारोह में आने के लिए कहा। दरअसल, अन्य वकील चाहते थे कि दरवेश और मनीष के बीच जो भी मनमुटाव है वह खत्म हो जाए। फिर अपने साथियों के कहने पर मनीष कोर्ट परिसर में तो आ गया। लेकिन इस दौरान वह बेहद गुस्से में था। मनीष घर से अपनी लाइसेंसी पिस्टल भी कोर्ट लेकर आया था।

यह है दरवेश और मनीष के विवाद का कारण

दरवेश के भतीजे सनी यादव ने मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने मनीष के साथ ही उसकी पत्नी वंदना शर्मा को भी आरोपी बताया है। सनी ने बताया कि, दरवेश की गाड़ी, गहने और चैंबर पर मनीष ने कब्जा कर रखा है। कई बार तकादा करने पर भी वह उनकी गाड़ी और गहने वापस नहीं कर रहा था। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था। मनीष की पत्नी ने दरवेश को जान से हाथ धोने की भी धमकी दी थी। लेकिन दरवेश ने इन बातों पर कभी ध्यान नहीं दिया। बता दें दरवेश ने अपने पिता के निधन के बाद पूरे परिवार का पालन पोषण किया। उन्होंने अपने छोटे भाई-बहनों को पढ़ाया-लिखाया और काबिल बनाया। पूरे परिवार की जिम्मेदारी दरवेश के कंधों पर ही थी।

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