AIMPLB को मस्जिद के लिए दूसरी जगह जमीन मंजूर नहीं, दाखिल करेगा पुनर्विचार याचिका

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चैतन्य भारत न्यूज

लखनऊ. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड (AIMPLB) ने यह ऐलान कर दिया है कि, वो सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या मामले पर फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका करेगा। साथ ही AIMPLB ने कहा कि उसे मस्जिद के बदले दूसरी जगह पर दी जाने वाली 5 एकड़ जमीन भी मंजूर नहीं है। उनका कहना है कि, दूसरी जमीन पाने के लिए वे लोग कोर्ट में नहीं गए थे। उन्हें वही पर जमीन चाहिए जहां पर बाबरी मस्जिद बनी थी।


मस्जिद के लिए दी गई 5 एकड़ की जमीन मंजूर नहीं

बता दें रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मुमताज डिग्री कॉलेज में 3 घंटे बैठक चली। इस बैठक में 45 सदस्य शामिल हुए। बैठक के बाद पर्सनल लॉ बोर्ड ने ये निर्णय लिया। बोर्ड ने एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करवाई जिसमें सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि, ‘बोर्ड ने तय किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा। बोर्ड ने साथ ही फैसला किया है कि मस्जिद के लिए दी गई 5 एकड़ की जमीन मंजूर नहीं है। मस्जिद की जमीन के बदले में मुस्लिम कोई दूसरी जमीन स्वीकार नहीं कर सकते हैं और न्यायहित में मुस्लिमों को बाबरी मस्जिद की जमीन दी जाए।’ AIMPLB ने यह भी कहा कि, ‘मुस्लिम किसी दूसरे स्थान पर अपना अधिकार लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं गए थे, बल्कि मस्जिद की जमीन पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए थे।’

9 दिसंबर से पहले दायर करेंगे पुनर्विचार याचिका

कासिम रसूल इलियास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा कि, ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कुल 10 बिंदुओं पर फैसले को लेकर सवाल उठाए और कहा कोर्ट के फैसले में कई खामियां हैं इसलिए इस पर पुनर्विचार याचिका जरूरी है।’
बोर्ड ने कहा कि, ‘हम मस्जिद के बदले जमीन नहीं लेंगे, शरीयत के हिसाब से हमें ऐसा कोई हक नहीं है क्योंकि शरीयत के मुताबिक एक बार जो मस्जिद हो गई वह आखरी समय तक मस्जिद ही होती है।’ साथ ही बोर्ड ने यह भी तय किया कि सुप्रीम कोर्ट में उनके केस की पैरवी राजीव धवन ही करेंगे। इस मामले में AIMPLB सुप्रीम कोर्ट में 9 दिसंबर से पहले पुनर्विचार याचिका दायर करेगा।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

वहीं इस मामले में पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा है कि, ‘वे कोर्ट का सम्मान करते हैं और इस मामले के दूसरे पक्षकारों की ओर से दायर की जाने वाले पुनर्विचार याचिका से उनका कोई लेना-देना नहीं है।’ गौरतलब है कि अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद देश के सबसे बड़े मामलों में से एक है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को फैसले देते हुए विवादित जमीन का मालिकाना हक रामलला विराजमान को दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने मस्जिद बनाने के लिए केंद्र सरकार को अयोध्या में दूसरी जगह पर मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था।

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