एअर इंडिया की 100% हिस्सेदारी बेचने के लिए आया सरकार का प्लान, 17 मार्च तक लगेगी बोली

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. सरकार ने एअर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का प्लान पेश कर दिया है। इसके मुताबिक एअर इंडिया एक्सप्रेस की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेची जाएगी। सरकार ने सोमवार को इस बारे में प्रारंभ‍िक जानकारी वाला मेमोरंडम जारी कर दिया। इसकी आखिरी तारीख 17 मार्च 2020 है। साथ ही, सरकार ने सब्सिडियरी कंपनी एअर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) और एयरपोर्ट सर्विस कंपनी AISATS को भी बेचने के लिए बोलियां आमंत्रित की है।



खबरों के मुताबिक, सरकार एअर इंडिया की 100% हिस्सेदारी बेच रही है। पिछले साल 76% शेयर बेचने के लिए बोलियां मंगवाई थीं, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिला। इसके बाद ट्रांजेक्शन एडवाइजर ईवाय ने बोली प्रक्रिया विफल रहने के कारणों पर रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट के आधार पर इस बार शर्तों में बदलाव किया गया है।

ये कंपनियां खरीद सकती है एअर इंडिया

एअर इंडिया के लिए संभावित बिडर्स में टाटा समूह, हिंदुजा, इंडिगो, स्पाइसजेट और कई निजी इक्विटी कंपनियां शामिल हैं। एअर इंडिया की नीलामी में शामिल होने के लिए कई विदेशी कंपनियां भी भारतीय कंपनियों से साझेदारी कर सकती हैं। कहा जा रहा है कि एअर इंडिया की हालत खस्ता होने के बावजूद उसे खरीदने में कंपनियां इसलिए रुचि दिखा रही हैं, क्योंकि उसके पास व्यापक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, ट्रैफिक राइट और लंदन, दुबई जैसे महत्वपूर्ण एयरपोर्ट पर स्लॉट हैं। उसके पास बड़ा टेक्निकल मैनपावर और फ्लीट भी है।

कर्ज में डूबी एअर इंडिया

रिपोर्ट के मुताबिक, एअर इंडिया पर हजारों करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसमें विमानों की खरीद और कार्यशील पूंजी हेतु लिए गए दीर्घकालिक कर्ज भी शामिल हैं। विनिवेश योजना की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया, ‘अब एअर इंडिया पर महज 18,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। जब इसके लिए बोली आमंत्रित की जाएगी, तो उसमें खातों में 18,000 करोड़ रुपए का कर्ज ही दिखाया जाएगा।’

ऐसे हुई थी एअर इंडिया की शुरुआत

साल 1932, अप्रैल में एअर इंडिया का जन्म हुआ था। उस समय के उद्योगपति जेआरडी टाटा ने इसकी स्थापना की थी, मगर इसका नाम एअर इंडिया नहीं था। तब इसका नाम टाटा एयरलाइंस हुआ करता था। टाटा एयरलाइंस की शुरुआत यूं तो साल 1932 में हुई थी, मगर जेआरडी टाटा ने साल 1919 में ही पहली बार हवाई जहाज तब शौकिया तौर पर उड़ाया था जब वो सिर्फ 15 साल के थे। जबकि पहली व्यावसायिक उड़ान उन्होंने 15 अक्टूबर को भरी जब वो सिंगल इंजन वाले ‘हैवीलैंड पस मोथ’ हवाई जहाज को अहमदाबाद से होते हुए कराची से मुंबई ले गए थे।

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