इंदौर एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई : सोने के नकली सिक्के के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का सरगना गिरफ्तार

चैतन्य भारत न्यूज

इंदौर. खुदाई के दौरान बेशकीमती रत्न और सोने के सिक्के मिलने और उन्हें सस्ते दामों में बेचने का झांसा देकर लोगों को लूटने वाले गिरोह के एक बदमाश रंजीत उर्फ रंजिन को इंदौर की स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने पकड़ लिया है। एसटीएफ ने सर्च ऑपरेशन के बाद उसे गिरफ्तार किया। आरोपित अंतरराज्यीय गिरोह का सरगना है। उसके गिरोह ने मप्र, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में सैकड़ों लोगों से इस तरह धोखाधड़ी करने की बात कबूली है।



यह गिरोह लोगों को सोने के सिक्के सस्ते दामों में देने के बहाने अपने इलाके के जंगलों में बुला लेता और फिर उन्हें लूट लेता। गिरोह के सरगना को पकड़ने के लिए एसटीएफ की टीम ग्राम झिरियाडोह में पहुंची तो उसने गांव वालों से टीम पर पथराव भी करवा दिया, लेकिन एसटीएफ की टीम सूझबूझ से आरोपित को अपने साथ गिरफ्तार कर ले आई। एसटीएफ एसपी श्री पद्मविलोचन शुक्ला ने बताया कि, एसटीएफ इंदौर के टीआई एम.ए. सैय्यद और प्रधान आरक्षक श्रीकृष्ण को सूत्रों से सोने के नकली सिक्के की धोखाधड़ी छोटू, रंजीत और गुलाब के द्वारा किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई थी।

इसके बाद एसटीएफ टीम के हेड कांस्टेबल श्रीकृष्ण बोर्डे, कांस्टेबल विनोद यादव, विराट, हेमंत और विकास ने अलग-अलग ग्राहक बनाकर रंजीत से सोने के कथित सिक्कों के लिए संपर्क किया। जैसे ही वह सिक्के देने को राजी हुआ तो 7 लोगों की टीम ने टिमरनी बैतूल रोड पर झिरियाडोह गांव में सिक्का लेने के बहाने उसे धर दबोचा। फिर रंजीत ने अपने गांव के लोगों को पुलिसकर्मियों को लुटेरा बताकर खुद को बचाने के लिए बुला लिया। वहां पहुंचे ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर पथराव भी शुरू कर दिया, उन पर बंदूकें भी तान दी लेकिन पूरी टीम ड्राइवर देवेंद्र की चालाकी के कारण बाल-बाल बचकर लौट आई।

एसटीफ की टीम ने रंजीत उर्फ रंजिन (30) पिता सरकस पारदी निवासी बैजनपुर थाना सिवनी मालवा जिला होशंगाबाद को गिरफ्तार किया है। आरोपित के कब्जे से 185 सोने के नकली सिक्के बरामद किए गए हैं, जो देखने में बिलकुल असली सोने के सिक्के जैसे लगते हैं। इस गैंग में आरोपित के छह भाई अरविंद पारदी (45), अरकिस पारदी (42), प्रहलाद पारदी (40), सरकिल पारदी (35), अरतिस पारदी (28) और आनंद पारदी (26) भी शामिल हैं। आरोपित के पिता सरकस पारदी (65) और चाचा चुन्नीलाल (75), रिश्तेदार नागदिलाल(70), निगरु, अर्जुन भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, उनके परिवार के लोगों के खिलाफ 20 से ज्यादा अपराध विभिन्न थानों में दर्ज हैं। गिरोह का आतंक इस कदर था कि उनके गांव या डेरे पर स्थानीय पुलिस का कोई अधिकारी तक नहीं जाता है। पुलिस को देखते ही गांव वाले पथराव कर हमला करने लगते हैं।

एसटीएफ टीआई सैय्यद ने बताया कि, आरोपित रंजीत की गैंग में बदमाश विजय उर्फ छोटू (30) पिता कमल हलवाई, गुलाब (35) निवासी झिरियाडोह भी शामिल हैं। इन दोनों आरोपितों की तलाश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, छोटू इंदौर के भंवरकुआ के ही एक होस्टल में काम करता है और वह इंदौर के ही लोगों को असली सोने का सिक्का दिखाकर झांसे में फंसा लेता था। जब लोग उस सोने के सिक्के की सुनार से जांच करवाते थे तो वह सिक्का असली ही बताया जाता था। दूसरा सिक्का मांगने पर भी वह उन्हें असली सिक्का ही देता था। जब लोगों को उस पर पूरी तरह से विश्वास हो जाता था तो वह लोगों को अपने सरगना रंजीत के पास गांव में सिक्के लेने चलने का कहता था और फिर दोनों मिलकर उन्हें लूट लेते थे, या फिर सोने जैसे दिखने वाले नकली सिक्के देकर उनसे रुपया ऐंठ लेते थे। जानकारी के मुताबिक, इस गैंग का मुख्य क्षेत्र इंदौर, टिमरनी, ढेकना, पगदाल, सिवनी मालवा, बैतुल रोड, झिरियाडोह गांव, गुजरात में सीकर, राजस्थान, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ में कुछ गांव हैं।

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