आज है आमलकी एकादशी, जानिए व्रत का महत्व और पूजन-विधि

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चैतन्य भारत न्यूज 

हिंदू धर्म में आमलकी एकादशी का काफी महत्व है। हर महीने में दो एकादशी व्रत आते हैं। एक कृष्ण पक्ष में तो दूसरा शुक्ल पक्ष में। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को ही मनाई जाती है। इस बार आमलकी एकादशी 25 मार्च, शुक्रवार को पड़ रही है। आइए जानते हैं आमलकी एकादशी का महत्व और पूजा-विधि।



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आमलकी एकादशी का महत्व

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस पेड़ के कण-कण में भगवान का वास होता है। शास्त्रों अनुसार इस पेड़ को खुद भगवान विष्णु ने जन्म दिया था। एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। जो लोग स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति की कामना रखते हैं, उनको आमलकी एकादशी के शुभ दिन पर आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर विष्णु भगवान की पूजा करनी चाहिए।

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आमलकी एकादशी पूजन-विधि

  • एकादशी के दिन सबसे पहले नित्‍य कर्म से निवृत्त होकर स्‍नान करें और स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें।
  • इसके बाद मंदिर में भगवान विष्‍णु के सामने हाथ में तिल, कुश, मुद्रा और जल लेकर व्रत का संकल्‍प करें।
  • अब विष्‍णु को पुष्‍प, ऋतु फल और तुलसी चढ़ाए।
  • इसके बाद श्री हरि विष्‍णु की आरती उतारें और उन्‍हें प्रणाम करें।
  • इसके बाद भगवान विष्‍णु को भोग लगाएं।
  • व्रती को आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।

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