आतंकी हमले के खतरे के कारण 14 दिन पहले थमी अमरनाथ यात्रा, 3.43 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

amarnath yatra,amarnath yatra stop

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. आतंकी हमले के खतरे को मद्देनजर रखते हुए जम्मू-कश्मीर में चल रही अमरनाथ यात्रा को रोक दिया गया है। प्रशासन ने शुक्रवार को एक एडवाइजरी जारी की जिसमें अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को जल्द से जल्द कश्मीर घाटी वापस छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें अमरनाथ यात्रा 15 अगस्त को रक्षाबंधन के पर्व पर संपन्न होने वाली थी, लेकिन खतरे को देखते हुए इसे 14 दिन पहले ही रोक दिया गया है।

1 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में अब तक कुल 3.43 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। शुक्रवार को 704 श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। प्रशासन की एडवाइजरी जारी होने के बाद अब अमरनाथ यात्री घाटी से अपने घरों के लिए लौट रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना को अमरनाथ यात्रा मार्ग में पाकिस्तान में बनी बारूदी सुरंग और अमेरिकी स्नाइपर राइफल मिली है। साथ ही सेना को दूरबीन व आईईडी के साथ ही विस्फोटकों का एक गुप्त भंडार भी मिला है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, अमरनाथ यात्रा मार्ग पर चलाए गए व्यापक तलाशी अभियान के दौरान गोला-बारूद बरामद किए गए हैं।

प्रशासन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया है कि, ‘आतंकी खतरे, खास तौर से अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने के खतरे पर खुफिया विभाग के ताजा इनपुट और कश्मीर घाटी के सुरक्षा हालात को ध्यान में रखते हुए अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों के हित में ये सलाह दी जाती है कि वो तुरंत ही घाटी में अपने ठहराव को छोटा करें और जल्द से जल्द वापस लौटने की कोशिश करें।’ अधिकारी के मुताबिक, अमरनाथ यात्रा मार्ग पर इस तरह की बारूद सुरंग मिलना किसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। उन्होंने आगे कहा, ये सभी हथियार उन क्षेत्रों में धमाका करने के लिए काम आते हैं जहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं या एक काफिले में आगे बढ़ रहे होते हैं। फिलहाल सुरक्षाबलों द्वारा पूरे क्षेत्र में खोजबीन जारी है।

ये भी पढ़े… 

VIDEO : अमरनाथ यात्रा के दौरान पहाड़ों से गिर रहा पानी और पत्थर, तो श्रद्धालुओं की ढाल बने ITBP के जवान

40 सालों में एक बार जल समाधि से बाहर निकलते हैं भगवान अती वरदार, 48 दिन भक्तों को देते हैं दर्शन

इस दिन से शुरू होगी श्रीखंड महादेव यात्रा, जान जोखिम में डालकर 18,500 फीट की ऊंचाई पर दर्शन करने पहुंचते हैं श्रद्धालु

Related posts