जयंती : समानता के लिए जीवनभर संघर्ष करते रहे डॉ. भीमराव आंबेडकर, जानिए संविधान निर्माता से जुड़ी कुछ खास बातें

baba saheb ambedkar

चैतन्य भारत न्यूज

आज डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती है। डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ। उन्हें बाबा साहब आंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है। उनके पिता रामजी वल्द मालोजी सकपाल महू में ही मेजर सूबेदार के पद पर तैनात थे। आंबेडकर का परिवार मराठी था। वो  मूल रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के आंबडवेकर गांव के रहने वाले थे।

महार जाति के होने के कारण आंबेडकर के साथ बचपन से ही भेदभाव शुरू हो गया था। प्रारंभिक शिक्षा लेने में भी उन्हें कई तरह की कठिनाई का सामना करना पड़ा। इन सबके बावजूद आंबेडकर ने न केवल उच्च शिक्षा हासिल की बल्कि, स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री बने। डॉ. आंबेडकर ने उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में सिर्फ 2 साल 3 महीने में 8 साल की पढ़ाई पूरी की। वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से “डॉक्टर ऑल साइंस” नामक एक मूल्यवान डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाले दुनिया के पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं। डॉ. बी. आर. आंबेडकर 64 विषयों में मास्टर थे। उन्हें 9 भाषाओं का ज्ञान था। इसके अलावा, उन्होंने लगभग 21 सालों तक दुनिया के सभी धर्मों का तुलनात्मक तरीके से अध्ययन किया।

29 अगस्त 1947 को उन्हें भारत के संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। डॉ. आंबेडकर को संविधान का फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने में आंबेडकर को 2 साल 11 महीने और 17 दिन लगे। साल 1952 में बाबा साहेब ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वो हार गए। फिर 1952 में उन्हें राज्य सभा के लिए नियुक्त किया गया और अपनी मृत्यु तक वो इस सदन के सदस्य रहे।

डॉ. आंबेडकर ने साल 1956 में समाजिक और राजनीतिक आंदोलन दलित बौद्ध आंदोलन चलाया था। इसमें भारत के लाखों दलितों ने हिस्सा लिया था। खास बात यह है कि डॉ. आंबेडकर की दुनिया में सबसे ज्यादा प्रतिमाएं हैं। साल 1950 में उनकी पहली प्रतिमा कोल्हापुर शहर में बनाई गई थी। इतना ही नहीं बल्कि बाबा साहेब आंबेडकर एकमात्र भारतीय हैं जिनकी प्रतिमा लंदन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगी हुई है। भारतीय तिरंगे पर ‘अशोक चक्र’ को जगह देने का श्रेय डॉ. आंबेडकर को जाता है। दुनियाभर में किसी भी नेता के नाम पर सबसे अधिक गाने और किताबें डॉ. आंबेडकर के नाम पर लिखी गई हैं।

साल 1906 में डॉ. आंबेडकर की शादी 9 साल की रमाबाई से हुई। उस समय आंबेडकर की उम्र महज 15 साल थी। सविता आंबेडकर, जो मूल रूप से एक ब्राह्मण परिवार से थीं, डॉ. बी. आर. आंबेडकर के साथ बौद्ध धर्म में परिवर्तित हो गईं। वर्ष 2003 में उनका निधन हो गया।

डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की लिखी आखिरी किताब का नाम ‘द बुद्ध एंड हिज धम्म’ था। इस किताब को पूरा करने के तीन दिन बाद ही 6 दिसंबर 1956 को आंबेडकर का निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार मुंबई में बौद्ध रीति-रिवाज के साथ हुआ। ‘द बुद्ध एंड हिज़ धम्म’ पुस्तक आंबेडकर की मृत्यु के बाद 1957 में प्रकाशित हुई। 31 मार्च 1990 को डॉ. आंबेडकर को मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया।

Related posts