मेंढकों को बचाने के लिए 100 छात्र बना रहे हैं नया उपकरण, अब असली जैसे नकली मेंढक पर होगा प्रयोग

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चैतन्य भारत न्यूज

फ्लोरिडा (अमेरिका). मिशेल हाई स्कूल इन फ्लोरिडा के 100 छात्र एक ऐसा यंत्र बना रहे हैं, जिससे प्राणियों के अंदर की शारीरिक संरचना का अध्ययन ज्यादा आसान हो जाएगा और इसके लिए मेंढक की चीर-फाड़ करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। जानकारी के मुताबिक, इसके अंदर वे सभी बॉडी ऑर्गन्स दिखेंगे, जो एक मेंढक में पाए जाते हैं। इसी यंत्र का प्रयोगशाला में मेंढक की जगह इस्तेमाल किया जा सकेगा।



इस यंत्र को प्रयोग में लाने का मुख्य उद्देश्य मेंढकों को बचाना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर साल 30 लाख से ज्यादा मेंढक विज्ञान के छात्रों द्वारा चीर-फाड़ दिए जाते हैं। ऐसे में इस यंत्र का प्रयोग कर मेंढक को बचाया जा सकता है। मिशेल स्कूल के मुताबिक, देशभर के छात्र नए शैक्षणिक सत्र से इस उपकरण का इस्तेमाल कर सकेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय स्तर से नीचे की कक्षाओं में मेंढक सबसे अधिक चीरा-फाड़ा जाता है। इस कारण मेंढकों जैसी सभी प्रजातियां पृथ्वी से धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं। बता दें मेंढक पर्यावरण में संतुलन बैठाने वाले जीवों में गिना जाता है।

पेटा इंटरनेशनल लेबोरेटरी के उपाध्यक्ष शालीन गाला के मुताबिक, ‘हाई स्कूल में सबसे ज्यादा घास मेंढक और बुलफ्रॉग इस्तेमाल किए जाते हैं। ढूंढने पर भी इस प्रजाति के मेंढक नहीं मिलते। यही कारण है कि सिनडैवर जो कि विश्व की प्रमुख मैन्युफैक्चरर, हाइपर रियलिस्टिक, सिंथेटिक ह्यूमन एंड एनिमल सर्जिकल ट्रैनर्स पार्टनर संस्था है, ने पेटा के साथ मेंढक का विच्छेदन रोकने के लिए भागीदारी की है।’

इसके अलावा शालीन ने कहा कि, ‘मेंढकों के प्रयोग के बजाय इस यंत्र का प्रयोग अधिक सुरक्षित, अधिक प्रभावी और अधिक मानवीय होगा। वर्तमान में सिनडैवर वेबसाइट पर मेंढकों को 150 डॉलर के लिए बेचा जा रहा है।’ उन्होंने बताया कि, ‘मेंढक की इस कीमत की तुलना में प्रकृति के संतुलन की कीमत बहुत अधिक है। प्रकृति के संतुलन में मेंढक का पार्ट बहुत अहम है। शारीरिक संरचना दिखाने के लिए जीवों की बलि देने के बजाय सिनफ्रॉग विज्ञान के छात्रों के लिए बेहतर विकल्प है और इसे दुनियाभर से समर्थन मिलेगा।’

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