बारिश ने बनाए और बिगाड़े कई साम्राज्य: अच्छा मानसून हुआ तो होगा मौर्य साम्राज्य का विस्तार और खराब मानसून में हुआ गुप्त वंश का पतन

चैतन्य भारत न्यूज

वैज्ञानिक हर थोड़े दिन में कोई न कोई नई खोज करते ही रहते है। अब इन्होंने हिमाचल की रिवालसर झील की तलहटी के नमूनों की जांच से करीब 3200 सालों में मानसून के पैटर्न का पता लगाया है। इस खोज से यह सामने आया है कि जिन कालखंडो में मौसम गर्म रहा, उस दौरान अच्छी बारिश हुई। जबकि जिन कालखंडो में ठंडक रही तब मानसून कमजोर हुआ। वैज्ञानिकों ने अपनी स्टडी में 4 कालखंडों में मानसून की गणना की है। ये चार कालखंड रोमन वार्म पीरियड, मिडिवल क्लाइमेट एनाबेली और लिटिल आइस पीरियड और करेंट वार्म पीरियड है।

मानसून का अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों से सीधा संबंध

बता दें अर्थव्यवस्था, साम्राज्यों और व्यापारिक गतिविधियों से मानसून का सीधा संबंध है। रोमन वार्म पीरियड के दौरान मानसून बेहद अच्छा रहा था। उस समय भारत में मौर्य वंश (323 ईसा पूर्व से 185 ईसा पूर्व) था। इस पीरियड में कृषि का काफी विस्तार हुआ। कई कस्बे और शहर भी बने। व्यापारिक केंद्र विकसित हुए। साथ ही कारोबार का विस्तार भी यूरोप, मेसोपोटामिया, मिस्र और अफ्रीकी तटों तक पहुंचा था। इसे स्वर्णिम दौर कहा जाता है। जबकि 450 से 950 ईस्वी में मानसून काफी कमजोर रहा। इस दौरान गुप्त वंश का पतन हुआ था। जानकारी के मुताबिक, 3200 वर्षों में मानसून 1400 से 1600 के बीच ही सबसे कमजोर रहा, तब भारतीय महाद्वीप में यूरोपीय यात्री पहुंचे। अरब और अफगानियों के हमले हुए और मुगल साम्राज्य के बाद ब्रिटिश साम्राज्य आया।

ऐसे पता लगाया- कब और कितनी बारिश हुई

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के शोधकर्ताओं के अनुसार, रोमन वार्म पीरियड में (1200 ईसा पूर्व से लेकर 450 ईसवी) मानसून काफी अच्छा रहा। जबकि इसके बाद यानी 450 ईसवी से 950 ईसवी तक बहुत कम बारिश और सूखे का लंबा दौर चला। इसके बाद मिडिवल क्लाइमेट एनाबेली (950 से 1350 ईस्वी तक) में मानसून थोड़ा अच्छा रहा। लेकिन फिर 1350 से 1600 ईसवी तक यानी लिटिल आइस पीरियड में मानसून वापस से कमजोर पड़ गया। इसके बाद करेंट वार्म पीरियड में मानसून सामान्य रहा।

रिसर्च के प्रमुख लेखक प्रो. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि, इस स्टडी के लिए झील के बीचों-बीच जहां पानी की गहराई 6.5 मीटर थी, वहां सेपिस्टन के जरिए 15 मीटर मोटी सतह का नमूना लिया गया। 14 नमूनों की रेडियोकार्बन डेट्स 200 से लेकर 2950 वर्ष पूर्व की तय की। नमूनों के ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन और कार्बन आइसोटोप्स रेश्यो के वैल्यू की गणना से पता लगाया कि कब कितनी बारिश हुई।

 

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