अंगारक विनायक चतुर्थी आज, इस पूजा विधि से करें भगवान गणेश और मंगलदेव की पूजा, जरूर पूरी होगी मनोकामना

चैतन्य भारत न्यूज

मंगलवार, 26 मई को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है। जब भी मंगलवार को चतुर्थी तिथि होती है तो उसे अंगारक विनायक चतुर्थी कहते हैं। इस तिथि पर गणेशजी के साथ ही मंगल ग्रह की विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन गणपति महाराज का उपवास करने से और उनकी पूजा-पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। मंगलवार का कारक ग्रह मंगल है। इस वजह से चतुर्थी पर मंगल की भी पूजा करें।

अंगारक चतुर्थी पर सबसे पहले गणेश पूजा करें, इसके बाद मंगल ग्रह को लाल फूल चढ़ाना चाहिए। इस ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। मंगल को जल चढ़ाएं, लाल गुलाल चढ़ाएं। इस शुभ योग में मंगल के लिए भात पूजा कर सकते हैं। इसमें शिवलिंग का पके हुए चावल से श्रृंगार किया जाता है और फिर पूजा की जाती है। ऊँ अं अंगारकाय नम: मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

पूजा विधि और नियम

  • चतुर्थी पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद किसी गणेश मंदिर जाएं या घर पर ही उनकी पूजा करें।
  • भगवान को सिंदूर, दूर्वा, फूल, चावल, फल, प्रसाद चढ़ाएं।
  • धूप-दीप जलाएं।
  • श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें।
  • गणेशजी के सामने व्रत करने का संकल्प लें और पूरे दिन अन्न ग्रहण न करें।
  • व्रत में फलाहार, पानी, दूध, फलों का रस आदि चीजों का सेवन किया जा सकता है।
  • पूजा में भगवान को दूर्वा और जनेऊ चढ़ाएं।
  • फलों का भोग लगाएं।
  • दीपक जलाकर आरती करें।
  • पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांटेें और स्वयं भी ग्रहण करें।
  • इसके बाद उनके 12 नाम वाले मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करें।
  • गणेशजी के मंत्र- ऊँ सुमुखाय नम:, ऊँ एकदंताय नम:, ऊँ कपिलाय नम:, ऊँ गजकर्णाय नम:, ऊँ लंबोदराय नम:, ऊँ विकटाय नम:, ऊँ विघ्ननाशाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ धूम्रकेतवे नम:, ऊँ गणाध्यक्षाय नम:, ऊँ भालचंद्राय नम:, ऊँ गजाननाय नम:।

 

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