कर्ज चुकाने के लिए अपनी सात कंपनी की संपत्तियों को बेच रहे अनिल अंबानी, जुटाएंगे 21,700 करोड़ रुपए

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चैतन्य भारत न्यूज

मुंबई. किसी जमाने में देश के दिग्गज अरबपतियों में शुमार और रिलायंस एडीएजी समूह के मालिक अनिल अंबानी इन दिनों भारी कर्ज के संकट से जूझ रहे हैं। इस कर्ज से मुक्ति पाने के लिए अब वह अपनी सात कंपनियों की संपत्तियों को बेचने जा रहे हैं। इन संपत्तियों को बेचकर उनका 21,700 करोड़ रुपए जुटाने का प्लान है। इस रकम से वह अपने कर्जे को कम करेंगे।

बता दें अंबानी पर 93900 करोड़ रुपए की कुल देनदारी है। इसलिए वह अपने संपत्ति बेचने को मजबूर हैं। जानकारी के मुताबिक, अंबानी पर रिलायंस कम्युनिकेशंस के अलावा समूह की चार और कंपनियों पर बहुत ज्यादा देनदारी है। जिन कंपनियों पर देनदारी है, उनमें रिलायंस कैपटिल पर 38,900 करोड़ रुपए, रिलायंस पावर पर 3 हजार करोड़ रुपए, रिलायंस इंफ्रा पर 17,800 करोड़ रुपए और रिलायंस इंजीनियरिंग पर 7 हजार करोड़ रुपए बकाया है। इसके अलावा आरकॉम कंपनी पर भी 35,600 करोड़ रुपए बकाया है।

अंबानी रेडियो यूनिट और म्यूचुअल फंड से लेकर रोड प्रोजेक्ट तक बेचकर 21,700 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वह पिछले 14 महीने के दौरान 35 हजार करोड़ रुपए का कर्ज चुका चुके हैं। रिलायंस ग्रुप के प्रवक्ता ने कहा कि, ‘रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर अपने 9 रोड प्रोजेक्ट्स बेचकर 9 हजार करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रहा है। वहीं रिलायंस कैपिटल को अपनी रेडियो यूनिट की बिक्री से 1200 करोड़ रुपए और फाइनेंशियल बिजनेस में अपनी होल्डिंग बेचने से 11,500 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है।’

गौरतलब है कि अंबानी ने इससे पहले 11 जून को कहा था कि, उन्होंने 14 महीने में अपनी संपत्तियां बेचकर 35 हजार करोड़ रुपए का कर्ज चुकाया है। हालांकि, अब भी उन पर भारी कर्ज है। इसलिए कंपनी आगे भी अपने देनदारी को समय-समय पर चुकाती रहेगी। साथ ही अनिल अंबानी ने निवेशकों को भरोसा देते हुए कहा था कि, ‘सालभर में कंपनी 24,800 करोड़ रुपए का मूलधन और 10,600 करोड़ रुपए का ब्याज वापस कर चुकी है।’

हालांकि, अंबानी के लिए यह संपत्ति बेचना आसान नहीं है। केयर रेटिंग्स ने अपने अप्रैल के बयान में रिलायंस कैपिटल के विनिवेश में देरी की ओर संकेत किया था। साथ ही कंपनी की रेटिंग में भी कटौती कर दी थी। इससे पहले वर्ष 2017 में रिलायंस कम्युनिकेशंस को जियो के हाथों बेचने की हुई डील भी साल 2019 की शुरुआत में रद्द हो गई।

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