सांप काटने से हर साल भारत में हो रही 46 हजार की मौत, सभी दवाएं बेअसर : शोध

snake bite

चैतन्य भारत न्यूज

बेंगलूरु. भारत को सर्पदंश की राजधानी कहा जाता है। लेकिन यहां बनने वाले एंटी वेनम ही सर्पदंशों पर कारगर नहीं है। उपचार के अभाव में भारत में हर साल 46 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। साथ ही 1 लाख 40 हजार से ज्यादा लोग हर साल अपंगता का शिकार हो जाते हैं।



देश की शीर्ष अनुसंधान संस्थाओं में से एक भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के शोध में इसका खुलासा हुआ है कि, बाजार में मौजूद एंटी वेनम कई विषैले सांपों के काटने पर निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं। इसका उपयोग करने वाले लोग न तो एंटी वेनम के असर से वाकिफ हैं और ना ही उन्हें यह पता है कि जिस एंटी वेनम का उपयोग किया जा रहा है उसका विपरीत असर भी हो सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यह एंटी वेनम जिस प्रोटोकॉल के तहत तैयार हो रहा है वह सदियों से अपरिवर्तित है।

चार प्रजाति को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा एंटी वेनम

दो सालों तक इस विषय पर शोध करने वाले आईआईएससी के प्रोफेसर कार्तिक सुनागर के मुताबिक, इस समय भारत में जो एंटी वेनम तैयार किए जा रहे हैं वह सिर्फ चार विषैले सांपों को ध्यान में रखकर हो रहे हैं। यह चार सांप हैं- कॉमन कोबरा, रसल वाइपर, सॉ स्केल्ड वाइपर और सामान्य क्रैट। लेकिन देश में कई और भी विषैली प्रजातियों के सांप हैं जिनका विष काफी घातक होता है। उनके लिए कोई एंटी वेनम देश में उपलब्ध नहीं है।

राजस्थान का सिंध करैत सांप सबसे जहरीला

शोध के मुताबिक, राजस्थान का सिंध करैत सांप भारत का सबसे जहरीला सांप है। इसका विष तो सामान्य कोबरा से 40 गुणा अधिक घातक है। लेकिन इसके लिए भी देश में कोई एंटी वेनम नहीं है। ये जहरीले सांप राजस्थान के अलावा पंजाब, उत्तराखंड और पाकिस्तान में भी पाए जाते हैं। इनके अलावा भी कई ऐसे सांप हैं जिनका कोई एंटी वेनम नहीं बनता। सर्पदंश का इलाज अस्पतालों में एंटी वेनम से ही होता है लेकिन किसी को यह नहीं मालूम होता है कि वह असरदार है या नहीं। उसका उपयोग कर सकते हैं या नहीं कर सकते। कई बार तो यह विपरीत प्रभाव डाल देता है।

क्षेत्रीय आधार पर सांप के जहर में अंतर 

शोध के मुताबिक, देश में पाई जाने वाली सांपों की 270 प्रजातियों में से 60 प्रजातियां चिकित्सकीय दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण हैं और सर्पदंश के प्रभावी उपचार के लिए क्षेत्रीय आधार पर एंटी वेनम तैयार होना चाहिए। प्रो. सुनागर ने अध्ययन के दौरान चार बड़े विषैले सांपों के अलावा भारत के और भी विषैले सांपों के विष का तुलनात्मक विश्लेषण किया। इसमें यह सामने आया कि क्षेत्रीय आधार पर सांपों के जहर में अंतर होता है। जिन चार सांपों को ध्यान में रखकर एंटी वेनम तैयार हो रहे हैं वे राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, अरुणांचल प्रदेश सहित अन्य क्षेत्रों के सांपों के काटने पर निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लिए अलग एंटीवेनम तैयार होना चाहिए तो पंजाब के लिए अलग। हमेशा एंटी वेनम का निर्माण क्षेत्रीय आधार पर सांपों के जहर की प्रकृति को ध्यान में रखकर तैयार होना चाहिए। लेकिन इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।

नए किस्म के एंटीवेनम के उत्पादन की उम्मीद

प्रो. सुनागर ने बताया कि कई एंटी वेनम निर्माता ने कंपनियों के साथ मिलकर क्षेत्रीय आधार पर एंटी वेनम का उत्पादन करना शुरू कर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्दी ही क्षेत्रीय आधार पर एंटी वेनम तैयार होगा जिनसे सर्पदंश का प्रभावी इलाज हो सकेगा।

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