राम जन्मभूमि परिसर से मिली प्राचीन प्रतिमाएं 8वीं शताब्दी की, पुरातत्वविद केके मोहम्मद ने किया दावा

ayodhya ram mandir

चैतन्य भारत न्यूज

अयोध्या. अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए समतलीकरण का कार्य जारी है। इसी दौरान की जा रही खुदाई में मंदिर के एक दर्जन से ज्यादा ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं। इनमें पाषाण स्तंभ पर बनी मूर्तियाें के अलावा बड़ी संख्या में देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, नक्काशीदार शिवलिंग और चौखट आदि मिले हैं। इसके अलावा जिस जगह ढांचे के तीन गुंबद थे, वहां एक के नीचे कुंआ भी मिला। पुरातत्वविद केके मोहम्मद इन अवशेषों को 8वीं शताब्दी का बता रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, कई स्थानों से चांदी के छत्र, सिंहासन और रामदरबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं, जिसकी जानकारी रामजन्मभूमि ट्रस्ट आने वाले दिनों में देगा। पुरातत्वविद केके मोहम्मद ने कहा कि, वे पहले भी यह कह चुके हैं कि राम जन्मभूमि परिसर में स्वर्णिम अतीत दफन है। इसलिए समतलीकरण का काम भी वैज्ञानिक तरीके से करना होगा।’ उनका कहना है कि, ‘श्रीराम मंदिर के ट्रस्ट को निर्माण के दौरान पुरातात्विक धरोहरों को संरक्षित करने के साथ अतीत के संकेतों को ध्यान में भी रखकर निर्माण की दिशा तय करनी होगी। समतलीकरण में मिली प्रतिमाएं और स्तंभों की तस्वीर देखने के बाद मैं यह कह सकता हूं कि यह 8वीं शताब्दी की हैं।’

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन मिश्र ने बताया कि, कोरोना वायरस का प्रकोप कम होने के बाद मंदिर निर्माण के लिए भूमि और नींव पूजन एक साथ होगा। साल 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने गर्भगृह से कुछ ही दूरी पर मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास किया था, उस हिस्से को भी समतल किया जाएगा। 2.77 एकड़ भूमि का पश्चिमी हिस्सा जो बहुत गहराई में है और पूर्वी हिस्सा जहां गर्भगृह मौजूद है, टीलेनुमा ऊंचाई वाला था। इन दोनों हिस्से को ही फिलहाल समतल किया जा रहा है और यहीं पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण होना है।

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