वकील से लेकर वित्त मंत्री बनने तक, काफी उतार-चढ़ाव से भरा है अरुण जेटली का राजनीतिक सफर

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दुनिया को अलविदा कह दिया। 66 वर्षीय जेटली लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें 9 अगस्त को दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिनों तक वेंटीलेटर पर रखने के बाद भी जब जेटली की सेहत में कोई सुधार नहीं आया तो फिर उन्हें एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सिजनेशन (ECMO) और इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (IABP) सपोर्ट दिया गया है। लेकिन आखिरकार वह अपनी जिंदगी से जंग हार गए और शनिवार को चल बसे।



जेटली भारतीय जनता पार्टी के सबसे ज्यादा भरोसेमंद और दिग्गज नेताओं में से एक थे। साल 2000 से ही जेटली भारतीय संसद के उच्च सदन में भाजपा का प्रतिनिधित्व करते रहे। जेटली ने वित्त मंत्री के तौर पर अपना पहला कार्यकाल बखूबी निभाया। इसके पहले भी वो एनडीए की सरकार में व्यापार और कानून मंत्री रह चुके हैं। जेटली का जन्म वकीलों के परिवार में हुआ था। वह एक जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता भी रह चुके हैं। कॉलेज के दिनों में जेटली बेहद समझदार छात्र हुआ करते थे। उन्होंने दिल्ली यूनीवर्सिटी से लॉ में स्नातक किया। बता दें जेटली दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा आपातकाल के समय वो जेल भी जा चुके हैं। जेल में जेटली ने भाजपा के कई नेताओं से मुलाकात की और उनकी राय और बोलने की कला को पसंद भी किया।

जेल से बाहर आने के बाद जेटली जनसंघ से जुड़ गए और फिर वे एवीबीपी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष बने गए। जब भाजपा पार्टी का गठन हुआ, तब साल 1980 में जेटली यूथ विंग के अध्यक्ष बने। पार्टी को खड़ा करने के लिए जब अटल और आडवाणी कड़ी मेहनत कर रहे थे उस समय उन्होंने जेटली को यह जिम्मा सौंपा कि वो यूथ को अपने भरोसे में लें। जेटली सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी करते थे। कुछ ही समय में वह देश के जाने-माने वकील बन गए थे। फिर उन्होंने साल 2009 में प्रैक्टिस छोड़ दी थी।

अटल जी की सरकार ने साल 1999 में उन्हें राज्य मंत्री बनाकर कानून एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण के साथ-साथ विनिवेश जैसे अहम मंत्रालयों का जिम्मा सौंपा गया। जेटली अटल जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माने जाते थे और उन्हें एक साल के भीतर ही कैबिनेट में जगह दे दी गई। साल 2009 में जेटली राज्यसभा के भीतर भाजपा की बड़ी आवाज बने। उन्होंने ही राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का दायित्व भी संभाला था। साल 2014 के आम चुनाव अभियान के दौरान भी जेटली भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक थे। उनकी वजह से ही भाजपा को 2014 में प्रचंड जीत मिली थी।

जेटली ने साल 2014 में लोकसभा के चुनाव में भी अपना भाग्य आजमाया था। लेकिन उस दौरान उन्हें अमृतसर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने हरा दिया था। इसके बाद अरुण जेटली ने 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद वित्त मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा संभाला था। सेहत खराब होने के चलते उन्होनें 2019 में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया था। जेटली मोदी कैबिनेट के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक थे। उन्हें क्रिकेट में भी दिलचस्पी थी और वो बीसीसीआई के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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