वैज्ञानिकों के हाथ लगी बड़ी कामयाबी, खोज निकाला ‘नया ग्रह’, तलाश रहे जीवन की आस

चैतन्य भारत न्यूज

खगोलशास्त्रियों ने पृथ्वी के सौर मंडल के पास ही एक नए ग्रह की खोज की है, इसे सुपर-अर्थ एक्सोप्लानेट का नाम दिया जा रहा है। इस नए ग्रह की सतह का तापमान पृथ्वी के सबसे निकट ग्रह शुक्र से थोड़ा ठंडा है। पृथ्वी के अलावा ब्रह्मांड में जीवन के सुराम तलाश रहे वैज्ञानिकों के लिए इस सुपर-अर्थ ग्रह के वातावरण का अध्ययन करना एक सुनहरा अवसर माना जा रहा है।

बता दें कि एक्सोप्लानेट वो ग्रह होते हैं, जो पृथ्वी के सौर मंडल के बाहर होते हैं। जर्मनी के मैक्स प्लैंक खगोलशास्त्र संस्थान के शोधकर्ताओं ने बताया कि ग्लीज 486 बी ही अपने आप मे जीवन की मौजूदगी के लिए एक आशाजनक उम्मीदवार नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो गर्म और सूखा है।

इस ग्रह की सतह पर लावा की नदियों के बहने की संभावना है लेकिन पृथ्वी से उसकी नजदीकी और उसके भौतिक लक्षण उसे वातावरण के अध्ययन के लिए एक आदर्श उम्मीदवार बनाते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि पृथ्वी और अंतरिक्ष दोनों से काम करने वाली अगली पीढ़ी की दूरबीनों से इस नए ग्रह का अध्ययन किया जा सकता है।

बता दें कि नासा इसी साल जेम्स वेब अंतरिक्ष टेलीस्कोप की शुरुआत करने जा रही है। इस टेलीस्कोप की मदद से वैज्ञानिक दूसरे एक्सोप्लानेट के वातावरणों को समझने के लिए जरूरी जानकारी निकाल सकते हैं। इनमें ऐसे ग्रह भी शामिल हैं, जहां जीवन की मौजूदगी की संभावना हो। विज्ञान की पत्रिका साइंस मेें छपे इस शोध के मुख्य लेखर ग्रह वैज्ञानिक त्रिफोन त्रिफोनोव का कहना है कि इस एक्सोप्लानेट का वातावरण संबंधी जांच करने के लिए सही भौतिक और परिक्रमा-पथ संबंधी विन्यास होना चाहिए।

क्या होता है सुपर अर्थ?

सुपर-अर्थ एक ऐसा एक्सोप्लानेट होता है, जिसका गहन हमारी पृथ्वी से ज्यादा होता है लेकिन इसका गहन नेप्यून और यूरेनस से काफी कम होता है। ग्लीज 486बी का घन पृथ्वी से 2.8 गुना ज्यादा है और हमसे सिर्फ 26.3 प्रकाश वर्ष दूर है। वैज्ञानिक त्रिफोनोव का कहना है कि ग्लीज 486बी रहने लायक नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ये ग्रह पृथ्वी की तरह रहने लायक नहीं है।

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