अयोध्या विवाद में मध्यस्थता पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने मांगे नाम

चैतन्य भारत न्यूज।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में राममंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में मध्यस्थता हो या नहीं इस पर आज सुनवाई हुई। जिसमें हिंदू महासभा ने शीर्ष कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से मध्यस्थता करने वालों के नाम मांगे। सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़े को छोड़कर रामलला विराजमान समेत हिंदू पक्ष के बाकी वकीलों ने मध्यस्थता का विरोध किया। हालांकि शीर्ष कोर्ट ने आज इस मामले में मध्यस्थता को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

दो-धर्मों की पूजा अर्चना से जुड़ा है मामला

सुनवाई कर रही संविधान पीठ का कहना है कि यह विवाद दो धर्मों की पूजा अर्चना से जुड़ा है, इसलिए इसे कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थ के जरिए सुलझाने की पहल की जानी चाहिए। पीठ ने कहा था कि मुख्य मामले की सुनवाई 8 हफ्ते बाद होगी तब तक आपसी समझौते से विवाद को सुलझाने का एक प्रयास किया जा सकता है।

सुनवाई में हिंदू महासभा की ओर से वकील हरिशंकर जैन ने मध्यस्थता का विरोध किया है, उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट में पार्टियां मान जाती हैं, तो आम जनता इस समझौते को नहीं मानेगी।

हम चाहते हैं कि बातचीत से हल निकले

इस पर जस्टिस एसए बोबडे ने कहा है कि आप सोच रहे हैं कि किसी तरह का समझौता करना पड़ेगा कोई हारेगा, कोई जीतेगा। मध्यस्थता में हर बार ऐसा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ जमीन का मसला नहीं है बल्कि भावनाओं का मसला है, इसलिए हम चाहते हैं कि बातचीत से हल निकले।

बोबडे ने कहा कि हम हैरान हैं कि विकल्प आजमाए बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है? कोर्ट ने कहा अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है पर हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं।

वहीं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह सिर्फ पक्षों का विवाद नहीं है। दोनों तरफ करोड़ों लोग हैं। मध्यस्थता में जो निकलेगा, वो सबको मान्य कैसे होगा। जिस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि आप आदेश दे देंगे तो सब मानेंगे।

फिर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मध्यस्थता के लिए जरूरी है कि समझौता सबको मान्य हो। मामला करोड़ों लोगों से जुड़ा हुआ है।

दस्तावेजों के अनुवाद पर अटक गई थी सुनवाई

पिछले हफ्ते अयोध्या मामले की सुनवाई यूपी सरकार की तरफ से कराए गए दस्तावेजों के अनुवाद पर विवाद के चलते अटक गई थी। मुस्लिम पक्ष ने मांग की थी कि वो दस्तावेजों को देखकर बताएगा कि अनुवाद सही है या नहीं। कोर्ट ने इसकी इजाज़त देते हुए सुनवाई टाल दी थी।

वहीं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हम मामले में जल्द फैसला सुनाना चाहते हैं। उन्होंने मामले में पक्षकारों से मध्यस्थों को नाम सुझाने को कहा है। शीर्ष कोर्ट इस बात पर बाद में विचार करेगा कि इस मुद्दे पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की जाए या नहीं।

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