सुप्रीम कोर्ट का फैसला : विवादित स्थल पर ही बनेगा राम मंदिर, मुस्लिम पक्ष को मिलेगी अलग से जमीन

ayodhya decision

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का फैसला किया है। जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर जगह देने के लिए कहा गया है। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन दी जाए। यानी कोर्ट ने मुस्लिमों को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया है। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि, ‘मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित करने में नाकाम रहा है।’

कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि, सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में कहीं भी पांच एकड़ जमीन दे। कोर्ट ने फैसले में कहा कि, ‘आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने साफ कहा कि फैसला कानून के आधार पर ही दिया जाएगा।’ ASI रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने कहा कि, ‘मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है।’ इस दौरान कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा तथा शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि अखाड़े का दावा लिमिटेशन से बाहर है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि, ‘अयोध्या के विवादित स्थल के बाहरी क्षेत्र पर हिंदुओं का दावा साबित होता है। 1856 से पहले मुस्लिमों का गुंबद पर दावा साबित नहीं होता।’

पांच जजों की बेच ने की सुनवाई

अयोध्या मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस पीठ में रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं। करीब 40 दिनों तक लगातार इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 16 अक्टूबर को सुनवाई खत्म हुई, जिसके बाद कोर्ट ने शनिवार को अपना फैसला सुना ही दिया।

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