राम मंदिर जमीन विवाद पर अयोध्या के महापौर ने तोड़ी चुप्पी, बोले- जिन्हें राम से दिक्कत वो लगा रहे आरोप, वर्षों पुराना है जमीन का अनुबंध

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चैतन्य भारत न्यूज 

राम मंदिर निर्माण के लिए राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन पर घोटाले का आरोप लगा है। अयोध्या के पूर्व विधायक और सपा सरकार में राज्य मंत्री रहे तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाए हैं। इसके बाद से ही राम मंदिर निर्माण को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। अब अयोध्या के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय सामने आए हैं और इस पूरे विवाद पर अपनी सफाई दी है।

दरअसल, बीते दिनों आरोप लगा है कि मंदिर निर्माण में काम आने वाली एक जमीन जिसकी कीमत 2 करोड़ रुपए थी, उसे 18 करोड़ रुपए में खरीदा गया। इन आरोपों के बाद राजनीतिक घमासान जारी है। ऋषिकेश उपाध्याय ने मीडिया समूह आजतक से बात करते हुए बताया कि, ‘राम मंदिर ट्रस्ट ने बयान जारी कर साफ कर दिया है कि वो भूमि वर्षों पुराने अनुबंध पर थी, उसी के अनुसार उसे अपने नाम कराया गया है। मैं मेयर के नाते सभी विषयों में गवाह हूं।’

ऋषिकेश उपाध्याय ने कहा कि, ‘जो पैसा ट्रांसफर हुआ है, वह उसके गवाह रहे हैं।’ जब उनसे यह पूछा गया की दस मिनट में कीमत कैसे बढ़ी तो इसके जवाब में महापौर ने सफाई देते हुए कहा कि, ‘वह अनुबंध वर्षों पुराना है, जिसे लोग कुछ मिनट बताया जा रहा है। जो लोग मुद्दा उठा रहे हैं, वो राजनीतिक लोग हैं। जिनको भगवान राम से दिक्कत है, वो लोग ये मुद्दा उठा रहे हैं।’

महापौर ने कहा कि, ‘मार्केट रेट क्या है, ये पता किया जा सकता है। आज एयरपोर्ट और अन्य चीज़ों के लिए भी सरकार अधिक दाम पर ज़मीन ले रही है। ट्रस्ट की ओर से ऑनलाइन पैसा दिया गया है, ऐसे में गड़बड़ी का कोई सवाल नहीं हो सकता है।’

गौरतलब है कि बीते दिन रविवार को ही समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाए है कि राम मंदिर की ज़मीन के नाम पर घोटाला किया गया है। दावा किया गया कि दो करोड़ की ज़मीन को सिर्फ दस मिनट के अंतर पर 18 करोड़ में खरीदा गया है। हालांकि, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की ओर से बयान जारी करते हुए इन आरोपों का खंडन किया गया है।

राम मंदिर के लिए खरीदी जमीन पर घोटाले का आरोप, कहा- 2 करोड़ से 18.5 करोड़ में खरीदी गई जमीन

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