पतंजलि की कोरोना दवा के प्रचार पर आयुष मंत्रालय ने लगाई रोक, मांगे ट्रायल के रिकॉर्ड

चैतन्य भारत न्यूज

बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने अपने पतंजलि आयुर्वेद से मंगलवार को कोरोना वायरस की दवा बनाने का दावा किया है। उन्होंने हरिद्वार में दिव्य कोरोनिल टैबलेट नामक दवाई लॉन्च की। पतंजलि ने यह दावा किया था कि इस दवा के सेवन करने पर रोगी पांच से 14 दिनों के भीतर ठीक हो जाता है। अब आयुष मंत्रालय ने पतंजलि के दावों पर संज्ञान लिया है।

मंत्रालय ने पतंजलि से कोरोना की दवा से जुड़े विज्ञापनों को बंद करने और इसपर अपने दावे को सार्वजनिक करने से मना किया है। आयुष मंत्रालय ने कहा है कि जब तक इसकी विधिवत जांच नहीं हो जाती, तब तक इसके प्रचार-प्रसार पर रोक लगी रहेगी। आयुष मंत्रालय ने कहा कि, ‘हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि किस तरह के वैज्ञानिक अध्ययन के बाद दवा बनाने का दावा किया गया है। साथ ही मंत्रालय ने इससे जुड़ी पूरी जानकारी भी मांगी है और यह साफ़ कहा है कि बिना मानक की जांच कराए हर तरह के विज्ञापन पर अगले आदेश तक रोक रहेगी।

आयुष मंत्रालय ने कहा कि, पतंजलि की कथित दवा, औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून, 1954 के तहत विनियमित है। उन्होंने पतंजलि से कहा है कि, वह नमूने का आकार, स्थान, अस्पताल जहां अध्ययन किया गया और आचार समिति की मंजूरी के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराए।

दवा को लॉन्च करते हुए योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा था कि, पूरे देश को कोरोना वायरस की दवा की प्रतिक्षा थी, इसलिए आखिरकर हमने दवा को तैयार कर लिया है। इस दवा का परीक्षण 280 रोगियों पर किया गया है और सभी रोगी स्वस्थ हो चुके हैं। 100 लोगों पर क्लिनिकल कंट्रोल ट्रायल की स्टडी की गई। 3 दिन के अंदर 69 फीसदी रोगी रिकवर हो गए, यानी पॉजिटिव से निगेटिव हो गए। सात दिन के अंदर 100 फीसदी रोगी रिकवरी हो गए। हमारी दवाई का सौ फीसदी रिकवरी रेट है और शून्य फीसदी डेथ रेट है।

क्या-क्या है दवा में शामिल?

आचार्य बालकृष्ण के अनुसार दवा में अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, श्वसारि रस व अणु तेल हैं। यह दवा अपने प्रयोग, इलाज और प्रभाव के आधार पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी प्रमुख संस्थानों, जर्नल आदि से प्रामाणिक है। अमेरिका के बायोमेडिसिन फार्माकोथेरेपी इंटरनेशनल जर्नल में इस शोध का प्रकाशन भी हो चुका है। पतंजलि का दावा है कि यह शोध संयुक्त रूप से पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट (PRI), हरिद्वार एंड नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (NIMS), जयपुर द्वारा किया गया है। दवा का निर्माण दिव्य फार्मेसी, हरिद्वार और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, हरिद्वार द्वारा किया जा रहा है।

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