75 सालों से बगैर भोजन-पानी के जिंदा रहे बाबा प्रह्लाद जानी, 90 साल की उम्र में निधन, मेडिकल साइंस के लिए बने पहेली

चैतन्य भारत न्यूज

पिछले 75 साल से बिना कुछ खाए-पिए रहने वाले प्रह्लाद जानी का मंगलवार को 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। जानकारी के मुताबिक, जानी पिछले कुछ दिनों से कफ की शिकायत से पीड़ित थे। उनका कोरोना वायरस का टेस्ट भी हुआ था जो नेगटिव आया। जिसके बाद जानी ने मंगलवार की सुबह गांधीनगर के चरवड़ा गांव में अंतिम सांस ली।

13 अगस्त 1929 को गुजरात के मेहसाणा जिले के छारड़ा गांव में जन्मे प्रह्लाद जानी को चुनरीव वाले माताजी के नाम से भी जाना जाता है। वह गुजरात के अहमदाबाद के अंबाजी इलाके में रहते थे। जानी के पार्थिव देह को अंबाजी स्थित उनके आश्रम में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया है। दो दिन बाद उनके पार्थिव शरीर को समाधि दी जाएगी।

बता दें जानी मेडिकल साइंस के लिए पहेली बने रहे। श्रद्धालुओं का दावा है कि उन्होंने 75 साल से न तो कुछ खाया है, और ना ही जल ग्रहण किया। वे बगैर भोजन-पानी के जिंदा रहे। वह दैनिक क्रियाओं को भी योग की शक्ति से रोक देने की वजह से चिकित्सा विज्ञान के लिए एक चुनौती बन गए थे।

इन दावों के बाद अहमदाबाद के स्टर्लिंग अस्पताल के चिकित्सकों ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के सहयोग से यह जानने के लिए शोध भी किया था कि कोई व्यक्ति इतने साल से बगैर कुछ खाए-पिए और बिना मल-मूत्र का त्याग किए कैसे जिंदा रह सकता है? लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि चिकित्सकों के हाथ कुछ भी नहीं लगा था। सच का पता लगाने के लिए जानी को 15 दिन तक 24 घंटे कैमरे की निगरानी में रखा गया था। उनका दावा सही पाया गया था। जाने 15 दिनों में एक बार भी कुछ खाते या पीते हुए नजर नहीं आए। मानव शरीर के सिस्टम के लिहाज से किसी से चमत्कार से कम नहीं था।

 

दरअसल चिकित्सकों को यह उम्मीद थी कि ऐसा क्यों और कैसे हो रहा है, यदि इसकी जानकारी मिल जाए तो यह अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ही दुर्गम स्थलों पर देश की सरहदों की सुरक्षा कर रहे सैनिकों के लिए बड़े काम की हो सकती है। लेकिन रिसर्च के बावजूद चिकित्सक इसका पता नहीं लगा पाए।

प्रहलाद जानी ने बताया था कि, ‘मैं जब 12 साल का था, तब कुछ साधू मेरे पास आए। कहा, हमारे साथ चलो, लेकिन मैंने मना कर दिया। करीब छह महीने बाद देवी जैसी तीन कन्याएं मेरे पास आयीं और मेरी जीभ पर अंगुली रखी। तब से ले कर आज तक मुझे न तो प्यास लगती है और न भूख।’ जानी का दावा था कि दैवीय कृपा तथा योग साधना के बल पर वे करीब 75 वर्ष से बिना कुछ खाए पिए-जिंदा हैं।

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