बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले, कभी ये हुआ करता था भोलेनाथ का निवास, लेकिन भगवान विष्णु ने धोखे से कर लिया था कब्जा

चैतन्य भारत न्यूज

बद्रीनाथ धाम के कपाट आज मंगलवार को ब्रह्ममुहूर्त में पुष्य नक्षत्र और वृष लग्न में 4 बजकर 15 मिनट पर खोल दिए गए। पूरे मंदिर को 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। कपाट खोलने के दौरान वहां पर सोशल डिसटेंसिंग का पालन करते हुए मुख्य पुजारी रावल के साथ कुछ लोग ही मौजूद थे।

6 महीने मानव और 6 महीने देवता करते हैं पूजा

कहा जाता है कि बद्रीनाथ धाम में छह महीने मानव और छह महीने देव पूजा करते हैं। अब अगले छह महीने तक यहां श्रद्धालु पूजन करेंगे और फिर मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे। हालांकि, कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष भी श्रद्धालु दर्शन नहीं कर सकेंगे. शीतकाल के दौरान देवर्षि नारद यहां भगवान नारायण की पूजा करते हैं।

ऐसा दूसरी बार हुआ है जब बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के समय सीमित संख्या में ही लोग मौजूद रहे। पुजारी रावल के अलावा धर्माधिकारी, अपर धर्माधिकारी, सीमित संख्या में ही हक हकूकधारी और देवस्थानम बोर्ड के अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे।

बता दें बद्रीनाथ में पहले भगवान शिव निवास करते थे लेकिन फिर यहां भगवान विष्णु रहने लगे। शिव और विष्णु एक-दूसरे के आराध्य थे। आइये आपको बताते हैं आखिर क्यों भगवान शिव को उनका निवास स्थान छोड़ना पड़ा था।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, बद्रीनाथ में भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ निवास करते थे। एक बार भगवान विष्णु ध्यान के लिए एकांत स्थान खोज रहे थे। ऐसे में उन्हें बद्रीनाथ काफी पसंद आया। लेकिन वहां पहले से ही शंकर जी रहते थे। फिर भगवान विष्णु ने एक तरकीब खोजी। उन्होंने एक छोटे बच्चे का भेष धारण कर लिया और जोर-जोर से रोने लगे। फिर माता पार्वती ने उन्हें घर से बाहर आकर चुप कराने की कोशिश की।

जैसे ही माता पार्वती उस बच्चे को घर के अंदर लेकर जाने लगीं तो भोलेनाथ को भगवान विष्णु की लीला को समझने में देर न लगी। भोलेनाथ ने माता पार्वती को मना भी किया लेकिन उन्होंने किसी की एक न सुनी। घर के अंदर लाने के बाद माता पार्वती ने उस बच्चे को थपकी देकर सुला दिया। जब बच्चा सो गया तो माता पार्वती कमरे से बाहर आ गईं। फिर बच्चे का भेष धारण किए भगवान विष्णु ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। जब भगवान शिव वापस आए तो बोले कि- मुझे ध्यान के लिए ये जगह बहुत पसंद आ गई है। आप कृपा करने परिवार सहित केदारनाथ धाम प्रस्थान करिए। भगवान विष्णु ने कहा- मैं भविष्य में अपने भक्तों को यहीं दर्शन दूंगा। बस तब से ही बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु का और केदारनाथ धाम भगवान शिव का निवास स्थल बन गया।

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