आज बंद हो जाएंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट, जानिए इस मंदिर जुड़ी कुछ रोचक बातें

badrinath,badrinath temple,badrinath kapat,badrinath kapaat band hone ka samay,kab band honeg badrinath ke kapaat

चैतन्य भारत न्यूज

सृष्टि का आठवां बैकुंठ कहलाने वाले बद्रीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर यानी आज कर्क लग्न में करीब शाम 5 बजकर 13 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे और इसी के साथ चार धाम यात्रा का समापन भी हो जाएगा। उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित यह हिंदू धर्म के चार धामों में शुमार है। यहां भगवान विष्णु 6 माह निंद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं।



badrinath,badrinath temple,badrinath kapat,badrinath kapaat band hone ka samay,kab band honeg badrinath ke kapaat

मंदिर को फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया है। कपाटबंदी उत्सव में शामिल होने के लिए 5 हजार से अधिक यात्री बदरीनाथ धाम पहुंच चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, 17 नवंबर को मां लक्ष्मी का स्त्री रूप रखकर रावल बद्रीश पंचायत में मां लक्ष्मी को विराजमान करेंगे और उसके साथ ही भगवान बद्री विशाल के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

आइए जानते हैं इस धाम से जुड़ी कुछ रोचक बातें…

  • ऐसी मान्यताएं हैं कि बद्रीनाथ पहले भगवान शिव का निवास स्थान हुआ करता था। लेकिन बाद में भगवान विष्णु ने इस स्थान को भगवान शिव से मांग लिया था।
  • बद्रीनाथ धाम से जुड़ी एक मान्यता काफी लोकप्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि ‘जो आए बदरी, वो न आए ओदरी’। इसका मतलब जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन एक बार कर लेता है उसे दोबारा माता के गर्भ में जाने की जरूरत नहीं होती।
  • यह मंदिर छह फीट के एक ऊंचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है। मंदिर में मुख्य भाग मंडप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है।

badrinath,badrinath temple,badrinath kapat,badrinath kapaat band hone ka samay,kab band honeg badrinath ke kapaat

  • बद्रीनाथ धाम दो पर्वतों की चोटी के बीच बसा हुआ है। इन पर्वतों को नर नारायण पर्वत कहा जाता है। भगवान विष्णु के अंश नर और नारायण ने यहीं तपस्या की थी। ऐसा कहा जाता है कि नर का अगला जन्म अर्जुन तो नारायण का जन्म श्रीकृष्ण के रूप में हुआ।
  • मान्यता है कि केदारनाथ के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ की यात्रा करना अधूरा माना जाता है। इससे तीर्थ यात्रा और दर्शन का कोई फल नहीं मिलेगा।
  • जब बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं उस समय मंदिर में जलने वाले दीपक के दर्शन का भी खास महत्व होता है। करीब 6 महीने तक बंद दरवाजे के अंदर देवता इस दीपक को जलाए रखते हैं।

ये भी पढ़े…

बद्रीनाथ धाम : कभी ये हुआ करता था भगवान शिव का निवास स्थल लेकिन विष्णु ने धोखे से कर लिया था कब्जा

ये हैं श्राद्ध के लिए सबसे पवित्र स्थान, जहां शत-प्रतिशत पितरों को मिलता हैं मोक्ष

हिमालय की पहाड़ी पर बनी है ऐसी झील, जहां होता है स्वर्ग का दीदार

Related posts