श्रीकृष्ण ने शुरू की थी मां सरस्वती की पूजा, जानिए इस दिन पीले रंग का महत्व

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चैतन्य भारत न्यूज

माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन सभी लोग अपने-अपने घरों में ज्ञान की देवी यानी मां सरस्‍वती की पूजा-अर्चना करते हैं।

क्या है वसंत पंचमी का महत्व

वसंत पंचमी के दिन कोई भी महत्वपूर्ण काम किया जा सकता है। इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। पढ़ाई की शुरुआत के लिए इसे सबसे बेहतर दिन माना जाता है। नई चीज सीखने के लिए भी यह सबसे अच्छा दिन होता है। इस दिन के बाद वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। इस दिन स्कूलों, शिक्षण संस्थानों और मंदिरों में खासतौर पर मां सरस्वती की प्रतिमा को पीले रंग के वस्त्रों और आभूषणों से सजाया गया है।

मां सरस्वती के जन्मदिन के रूप में भी इस दिन को मनाया जाता है। इस दिन को वाद्य यंत्रों, पुस्तकों, शस्त्रों, शास्त्रों की पूजा की जाती है। व्यापारी अपने बाट और बहीखाते की भी पूजा करते हैं। इस दिन ज्ञान की प्राप्ति होती है।

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श्री कृष्ण ने शुरू करवाई थी पूजा

मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने मां सरस्वती की पूजा शुरू करवाई। इसके पहले मां सरस्वती को पूजा नहीं जाता था। श्रीकृष्ण बीज मंत्र को शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानते थे। सरस्वती नदी संकट में थी, इसलिए पूजा शुरू हुई। श्रीकृष्ण ने मां सरस्वती के आदर सम्मान करने का आग्रह किया।

कैसे करें पूजन

  • पूजा के स्थान को साफ करें।
  • हल्दी और नैवेद्य रख लें।
  • दान के लिए भोजन या धन निकाल लें।
  • मां सरस्वती को सफेद या पीले वस्त्र पहनाएं।
  • 8 साल से छोटी लड़की को भोजन दान दें।
  • भोजन ना होने पर धन का दान करें।
  • मुहूर्त के दौरान पूजा करें, ‘ऐं’ मंत्र का कम से कम 5 माला का जाप करें।
  • इस मंत्र का ज्यादा बार जाप करने से अधिक लाभ होगा।
  • हल्दी की माला से जाप करें।
  • अपने काम से संबंधित चीज की पूजा करें, मां से आशीर्वाद और ज्ञान मांगें, मां की पीले वस्त्रों में आराधना करें।
  • मुहूर्त के दौरान जाप करें।

पूजन के समय रखें ध्यान

  • मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित कर वंदना करें।
  • बच्चों को शिक्षा संबंधी सामग्री दें और पीला भोजन करें।
  • पूजा के स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें।


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बसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व

बसंत पंचमी पर पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत ही शुभ माना गया है। इसके पीछे दो कारण महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पहला- बसंत पंचमी के दिन से कड़कड़ाती ठंड खत्म होकर मौसम सुहावना होने लगता है। हर तरफ पेड़-पौधों पर नई पत्तियां, फूल-कलियां खिलने लग जाती हैं। गांव में इस मौसम में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नजर आती है। इस पीली धरती को ध्यान में रखकर लोग बसंत पंचमी का स्वागत पीले कपड़े पहनकर करते हैं। वहीं, दूसरी मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण होता है। जिसकी पीली किरणें इस बात का प्रतीक है कि सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए।

 

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