स्टॉक ट्रेडिंग की बुनियादी रणनीति

टीम चैतन्य भारत।

शेयर ट्रेडिंग में पहली जरूरत यह जानने की होती है कि बिकवाली कब करनी है। बाजार से पैसा बनाने की तगड़ी से तगड़ी रणनीति के केंद्र में यही चीज होती है। इसके अलावा बाजार के ट्रेंड समझना और घबराकर कोई निर्णय लेने से बचना ऐसी बुनियादी बातें हैं, जिनका हमेशा ध्यान रखना चाहिए। आइए देखें कि रणनीति क्या होना चाहिए।

स्टॉक ट्रेडिंग की बुनियादी रणनीति

शेयर बाजार की इंट्राडे ट्रेडिंग में निवेशकों और ट्रेडरों को निवेश करने या पैसा बनाने के मौके उपलब्ध रहते हैं। सबसे सफल इंट्राडे ट्रेडर वैसे लोग होते हैं, जो इसकी सबसे तगड़ी रणनीति अपनाते हैं और हमेशा इसके नियम-कायदे से चिपके रहते हैं। ऐसा कोई त्वरित फॉर्मूला नहीं है, जो फौरन मोटा मुनाफा दिला सके।

इंट्राडे ट्रेडिंग की अवधारणा केवल इतनी है कि आपको एक ही दिन पोजीशन भी लेना होता है और क्लोजिंग भी करनी होती है। व्यक्तिगत ट्रेडर बाजार खुलते ही शेयर खरीद सकते हैं और ट्रेडिंग बंद होने से पहले उन्हें बेच सकते हैं। वास्तव में शेयर बाजार ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां शेयरों की खरीद-फरोख्त मुनाफे के अनुरूप होती है।

हर ट्रेडर के लिए जरूरी होता है कि वह फायदेमंद ट्रेडिंग रणनीतियों के तहत डील करे। ऐसी रणनीतियों की बदौलत ट्रेडर यह विश्लेषण करने में सक्षम हो जाता कि कौन सा शेयर खरीदने की जरूरत है और अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए शेयर बेचने का सबसे मुफीद मौका कब है। टेक्निकल/फंडामेंटल विश्लेषकों की सलाह के हिसाब से डील करने वाले ट्रेडर सटीक बाजार रणनीति का पूरा फायदा उठा सकता है।

सफल ट्रेडिंग और इसके जरिए मुनाफा कमाने के लिए कुछ स्थापित रणनीतियां अपनाने की जरूरत होती है। शेयर ट्रेडिंग की ऐसी ही कुछ रणनीतियों पर एक नजर…

अपना घाटा कम करें

हर ट्रेड के मामले में नुकसान कम करना महत्वपूर्ण पहलू होता है। ट्रेडरों को नई शेयर खरीद करने से पहले नुकसान प्रतिशत का आंकलन कर लेना चाहिए। दरअसल नुकसान कम करना सबसे अहम रणनीति होती है क्योंकि यह मुनाफे का प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि पिछले 10 महीनों से आप कुल मिलाकर 50 प्रतिशत मुनाफे पर हैं। लेकिन, पूरे साल का हिसाब लगाएं तो आप 30 प्रतिशत नुकसान पर हैं। ऐसे में एक साल का आपका मुनाफा केवल 20 प्रतिशत रह जाता है। जरा गौर करें कि इसमें फर्क कहां आ रहा है।

आप 50 प्रतिशत मुनाफे पर थे, लेकिन चूंकि आपने ट्रेडिंग में नुकसान कम करने पर ध्यान नहीं दिया, लिहाजा आपका मुनाफा घटकर महज 20 प्रतिशत रह गया। असल में आपको अपने शेयरों का चयन, खरीद और उनपर नजर रखने की जरूरत होती है, लेकिन यदि कोई ऐसी बात हो जाए जिसका अंदाजा आपको नहीं था तो ऐसे में नुकसान कम करने के लिहाज से कुछ शेयर बेच देने चाहिए। इसके बाद शेयरों के चयन पर नए सिरे से ध्यान देना चाहिए।

रिस्क मैनेजमेंट

रिस्क मैनेजमेंट का अर्थ उस तरीके से है, जिसके तहत पहले से संभावित जोखिम का अंदाजा लगाकर उससे सुरक्षा के उपाय किए जाते हैं, ताकि जोखिम कम किया जा सके। जब भी कोई निवेश का फैसला करता है, तो वह खुद को कुछ हद तक वित्तीय जोखिम में डालता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि उसने निवेश के कैसे साधनों में पैसा लगाया है। जब वित्तीय जोखिम बाजार के उतार-चढ़ाव, पूंजी बाजार में मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे कारणों से बढ़ता है, तो ऐसी स्थिति में निवेशक और फंड मैनेजर रिस्क मैनेजमेंट की बारीकियों के हिसाब से फैसले करते हैं। चूंकि शेयर बाजार के कारोबार में जोखिम होता ही है, लिहाजा रिस्क मैनेजमेंट के जरिए संभावित जोखिम कम से कम किया जा सकता है। भारी नुकसान से बचने के लिए स्टॉप-लॉस का तरीका अपनाया जा सकता है।

मुनाफा बढ़ने दें

निवेश के मामले में अपना मुनाफा बढ़ने देना महत्वपूर्ण रणनीति होती है। यह रणनीति ट्रेडरों के बीच मुनाफे की स्थिति में बहुत पहले बिकवाली की प्रवृत्ति स्वीकारती है। ज्यादातर ट्रेडरों में आगे चलकर मुनाफा कम होने या फिर घाटा होने की आशंका से जल्द मुनाफा काट लेने की आदत देखी जाती है। लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं होता। मुनाफा बढ़ने देना एक सोची-समझी रणनीति होनी चाहिए। अपने ट्रेड कौशल पर भरोसा रखना चाहिए और भारी उतार-चढ़ाव वाले माहौल में घबराकर बिकवाली करने से बचने की जरूरत होती है। ऐसे में थोड़ा साहस दिखाना चाहिए। दरअसल, जोरदार मुनाफे वाली ट्रेडिंग में काफी धैर्य और साहस की जरूरत होती है।

ट्रेंड पर नजर रखें

ट्रेडरों को बाजार की चाल पर नजर रखनी चाहिए। उन्हें लंबी अवधि में बाजार की संभावित स्थिति का फायदा उठाने की नीति पर चलते हुए निवेश करना चाहिए। ट्रेंड के हिसाब से चलना ऐसी रणनीति है, जो सभी तरह की ट्रेडिंग में समान रूप से लागू होती है।

ओवरट्रेड से बचें

शेयर ट्रेडर को हमेशा हर ट्रेड की वैल्यू पर फोकस करना चाहिए, केवल शेयरों की संख्या पर ध्यान देना जोखिम बढ़ाना है। ओवरट्रेडिंग मुश्किल स्थिति में डाल सकती है। लगातार ऐसा करने पर बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

हमेशा लिक्विड शेयरों में ट्रेडिंग करें

लिक्विड स्टॉक्स ऐसे शेयरों को कहा जाता है, जिन्हें आसानी से बेचा जा सके। वजह यह है कि बाजार में रोजाना भारी मात्रा में शेयरों की खरीद-फरोख्त होती है। यदि किसी ट्रेडर ने केवल लिक्विड स्टॉक्स में ट्रेड किया है तो बाजार गिरने की स्थिति में भी वह आसानी से बाहर निकल सकता है। ऐसे में नुकसान कम करने में मदद मिलती है।

पोजीशन छोटा रखें

शेयर बाजार में सफल ट्रेडिंग का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हर ट्रेड में उचित पोजीशन साइज रखी जाए। पोजीशन साइज का मतलब है कि किसी ट्रेडर को किसी स्टॉक में कितने शेयरों में पोजीशन लेना है और फ्यूचर ट्रेड में उसे कितने कांट्रैक्ट और लॉट पर दांव लगाना है। हकीकत यह है कि पोजीशन का चयन बगैर किसी लक्ष्य के नहीं करना चाहिए। इसकी जगह यह फैसला गणित के फॉर्मूले के हिसाब से करना चाहिए, जो जोखिम पर नियंत्रण रखने और मुनाफा बढ़ाने में मददगार साबित होता है। नुकसान कम करने के लिए सलाह होगी कि ट्रेड में छोटा पोजीशन लें।

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