भारत में कोरोना वायरस के कम मामलों के पीछे बीसीजी का टीका है वजह! अमेरिकी शोधकर्ताओं ने जगाई इलाज की नई उम्मीद

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस का संक्रमण दुनिया के 200 से ज्यादा देशों में फैल चुका है। भारत में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या दो हजार के करीब पहुंच गई है। जबकि देश में 50 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, अन्य देशों की तुलना में कोरोना के मामले कम है। इसे लेकर अमेरिका में हुए एक अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई है। अमेरिकी शोधकर्ताओं का मानना है कि भारत में कोरोना के कम मामलों के पीछे बीसीजी टीके की अहम भूमिका है।

बता दें टीबी जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नवजात शिशु को बैसिलस कैलमेट गुयरिन (बीसीजी) का टीका लगाया जाता है। अब यही कोरोना वायरस संक्रमण में सुरक्षा के तौर पर सामने आया है। अध्ययन के मुताबिक कोरोना संक्रमण और उससे हुई मौत के मामले उन देशों में सबसे ज्यादा हैं, जहां बीसीजी टीकाकरण की पॉलिसी या तो नहीं है या फिर बंद हो गई है। इटली, नीदरलैंड्स और अमेरिका में बच्चों को यह टीका नहीं दिया जाता। ऐसे में वहां संक्रमितों व मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं, भारत, जापान, ब्राजील समेत जिन भी देशों में बीसीजी टीकाकरण अभियान चल रहा है, वहां कोरोना संक्रमण और मौत के मामले कम हैं।

न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस द्वारा बीसीजी टीकाकरण वाली आबादी पर कोरोना संक्रमण के असर का विश्लेषण करने के लिए यह अध्ययन किया गया। न्यूयार्क इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी बायोकेमिकल साइंसेज के असिस्टेंट प्रोफेसर गोंजालो ओताजू ने कहा कि, ‘इस संबंध में हुए अध्ययन में हमने पाया कि कोविड-19 से निपटने में बीसीजी कारगर हो सकता है।’

विश्व में बीसीजी टीके की शुरुआत साल 1920 में हुई थी। 1920 से ब्राजील में, 1947 से जापान में और 1948-49 से भारत में इसकी शुरुआत हुई थी। वहीं ईरान में इसकी शुरुआत 1984 में हुई। बता दें अब तक कोई भी देश कोरोना वायरस का सटीक इलाज नहीं ढूंढ सका है। ऐसे में बीसीजी के टीके से कुछ उम्मीद बंधी है। हालांकि, कोरोना वायरस पर इस टीके के प्रभाव को देखने के लिए अभी थोड़ा समय लगेगा।

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