इन मंदिरों में होती है गणपति बप्पा की स्त्री अवतार में पूजा, दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं सारे कष्ट

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चैतन्य भारत न्यूज

गणेश उत्सव के इस खास मौके पर हम आपको रोजाना भगवान गणेश के विश्वभर में प्रसिद्द कुछ खास मंदिरों के बारे में बताएंगे। इस कड़ी में हम आपको आज भगवान गणेश के एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं जहां गणपति जी की स्त्री अवतार में अराधना होती है।

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गणेश जी के इस स्त्री अवतार को विनायकी कहा जाता है। काशी और उड़ीसा में गणेश जी के ऐसे स्‍वरूप की पूजा भी होती है। मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। विनायकी देवी अपने एक हाथ में युद्ध परशु और दूसरे हाथ में कुल्‍हाड़ी थामे रहती हैं।



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कहा जाता है कि सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु से लेकर इंद्र और अर्जुन तक सभी को किसी न किसी वजह से स्त्री रूप धारण करना पड़ा था। लेकिन ये बात कम ही लोग जानते हैं कि गणेश जी को भी एक बार स्त्री रुप धारण करना पड़ा था। गणेश के विनायकी रूप की मूर्तियां देश के कई मंदिरों में देखने को मिल जाएंगी, जिसमें से तमिलनाडु के चिदंबरम मंदिर, जबलपुर के पास चौसठ योगिनी मंदिर आदि में ऐसी प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं। इसके अलावा उड़ीसा के रानीपुर झरियाल में भी ऐसी प्रतिमाएं प्राप्त होती रही हैं।

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कहा जाता है कि विनायकी की जो सबसे पुरानी मूर्ति थी वह टेराकोटा से बनी आज से करीब 2100 साल पहले राजस्‍थान में पाई गई थी। धर्मोत्तर पुराण में गणेशजी के विनायकी रूप का उल्लेख मिलता है। वहीं, वन दुर्गा उपनिषद में भी गणेश्वरी का नाम दिया गया है। इतना ही नहीं, मत्स्यपुराण में भी गणेशजी के इसी स्त्री रूप का वर्णन किया गया है।

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