भानु सप्तमी पर बन रहा हैं दुर्लभ संयोग, सुख-समृद्धि के लिए ऐसे करें सूर्यदेव की पूजा

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को बेहद खास माना गया है। इसे भानु सप्तमी के नाम से जाना जाता है। इस बार भानु सप्तमी 3 नवंबर को पड़ रही है। ज्योतिष के मुताबिक, इस साल भानु सप्तमी पर अद्भुत संयोग बनने जा रहा है जिसका शुभ फल मिलने वाला है। आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ संयोग, पूजा-विधि और मंत्र।



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भानु सप्तमी का अद्भुत संयोग

भगवान सूर्यनारायण की विशेष कृपा पाने के लिए भानु सप्तमी का व्रत किया जाता है। इस व्रत को रखने से दरिद्रता का नाश होने के साथ धन, वैभव, ऐश्वर्य और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इस बार रविवार के दिन सप्तमी तिथि के संयोग से ‘भानु सूर्य सप्तमी’ पर्व का सृजन होता है। ग्यारह हजार रश्मियों के साथ तपने वाले सूर्य ‘भग’ रक्तवर्ण है। यह सूर्यनारायण के सातवें विग्रह है और एश्वर्य रूप से पूरी सृष्टि में निवास करते हैं। जबकि ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य ये छह भाग कहे जाते हैं। इस साल रविवार और भानु सप्तमी का एक ही दिन होना शुभ फल प्रदान करने वाला है।

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भानु सप्तमी की पूजा-विधि

  • भानु सप्तमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके उगते हुए सूर्य का दर्शन एवं उन्हें ‘ॐ घृणि सूर्याय नम:’ कहते हुए जल अर्पित करें।
  • इस दिन सूर्य की किरणों को लाल रोली और लाल फूल मिलाकर जल दें।
  • इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व होता है। अगर चाहे तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
  • स्नान के दौरान सूर्य मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

”एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।

अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।”

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इन सूर्य मंत्रों के जाप से मिलता है अधिक लाभ 

  • ॐ मित्राय नमः
  • ॐ रवये नमः
  • ॐ सूर्याय नमः
  • ॐ भानवे नमः
  • ॐ खगाय नमः
  • ॐ पुष्णे नमः
  • ॐ हिरन्यायगर्भय नमः
  • ॐ मरीचे नमः
  • ॐ सवित्रे नमः
  • ॐ आर्काया नमः
  • ॐ आदिनाथाय नमः
  • ॐ भास्कराय नमः
  • ॐ श्री सवितसूर्यनारायण नमः

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