कई राज्यों में दिखा ‘भारत बंद’ का असर, रोकी गई ट्रेन-बसें, ये हैं ट्रेड यूनियनों की मांगें

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. मोदी सरकार की आर्थिक और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आज भारत के कई ट्रेड यूनियन और संगठनों ने भारत बंद का ऐलान किया है। बुधवार सुबह से ही भारत बंद का असर भी दिखने लगा है। इसका ज्यादा असर बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ा। संगठन ने दावा किया है कि, इस भारत बंद में 25 करोड़ लोग शामिल होंगे।



ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद का असर दिखने लगा है। बंगाल के गुवाहाटी, ईस्ट मिदनापुर में प्रदर्शनकारियों ने ट्रांसपोर्ट को रोकना शुरू कर दिया है। साथ ही हावड़ा में ट्रेन भी रोक दी गई है। बंगाल में प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए बस ड्राइवर हेलमेट पहनकर बस चला रहे हैं, ताकि किसी तरह के हमले से बचा जा सके।


मुंबई के पास वकोला में एक्सप्रेस हाइवे पर बंद समर्थक प्रदर्शनकारियों की वजह से जाम लगा हुआ है। जाम की वजह से लोगों को आने-जाने में दिक्कत आ रही है।

ओडिशा में भी भारत बंद का असर देखने को मिला। भुवनेश्वर में कांग्रेस समर्थित ट्रेड यूनियन के कार्यकर्ताओं ने सड़क को ब्लॉक किया, इसके अलावा ट्रेन को भी रोका गया।


भारत बंद के दौरान चेन्नई में भी कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। देश के कई हिस्सों में भारत बंद के तहत प्रदर्शन किया जा रहा है, इस दौरान बंगाल में ट्रेन रोकी गई है तो वहीं हाइवे को भी जाम कर दिया गया है। इस दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में भी लिया।

जिन ट्रेड यूनियन ने भारत बंद बुलाया है, उनका दावा है कि केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक और जन विरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे लेबर लॉ का भी विरोध किया जा रहा है। वहीं स्टूडेंट यूनियन द्वारा शिक्षण संस्थानों में फीस बढ़ाने का विरोध किया जा रहा है। यूनियन की मांग है कि केंद्र सरकार का कर्मचारियों से बातकर नीतियों को आगे बनाना चाहिए।


कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस भारत बंद का समर्थन किया है। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा कि, ‘मोदी सरकार की आर्थिक विरोधी नीतियों के खिलाफ जो आवाज उठाई जा रही है, उन कर्मचारियों को वो सलाम करते हैं।’


महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा है कि, ‘वह ट्रेड यूनियन के द्वारा बुलाए गए भारत बंद का समर्थन करते हैं।’

ये हैं ट्रेड यूनियनों की मांग

जानकारी के मुताबिक, यूनियन की तरफ से 13 प्वाइंट की मांग रखी गई हैं, जिनमें आम लोगों की जरूरत वाली चीजों के बढ़ते दाम को काबू करना भी शामिल है। पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम, बेरोजगारी, महंगाई पर काबू पाने के लिए नीति बनाना। इसके अलावा मुख्य मांग है, मजदूरों की तनख्वाह बढ़ाना। यूनियन का कहना है कि, यूनियन मजदूरों की न्यूनतम तनख्वाह 21 हजार रुपए प्रति माह होनी चाहिए। इसके अलावा यूनियन की कुछ और भी मांगे हैं जो इस प्रकार हैं-

  • सोशल हेल्थ सर्विस में खुद को शामिल करना।
  • मजदूरों को मिड डे मील मिलना।
  • 6000 रुपए की न्यूनतम पेंशन।
  • पब्लिक सेक्टर बैंक के मर्जर का विरोध

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