महात्मा गांधी का ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ जिसने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया था

चैतन्य भारत न्यूज

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ देश के सबसे बड़े आंदोलन में से एक था जिसकी वजह से अंग्रेज भारत छोड़ने पर मजबूर हो गए थे। यह आंदोलन ऐसे समय पर शुरू हुआ जब दुनिया काफी बदलावों के दौर से गुजर रही थी। 9 अगस्त, 1942 ई. में इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी। बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान पर अखिल भारतीय कांग्रेस महासमिति ने प्रस्ताव पारित किया था जिसे ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव कहा गया।


‘भारत छोड़ो आंदोलन’ ने ब्रिटिश शासन की नींव को हिलाकर रख दिया। अप्रैल 1942 में ‘क्रिप्स मिशन’ के असफल होने के लगभग चार महीने बाद ही स्वतंत्रता के लिए भारतीयों का तीसरा जन आंदोलन ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ आरंभ हो गया। इसे ‘अगस्त क्रांति’ भी कहा जाता है। भारत छोड़ो का नारा युसुफ मेहर अली ने दिया था। 1942 में जब दूसरे विश्वयुद्ध में भारत से सहायता लेने के बाद भी अंग्रेजों ने भारत को आजाद करने का अपना वादा पूरा नहीं किया तो गांधी जी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत की। गांधीजी ने इस आंदोलन को अहिंसक रूप से चलाने का आह्वान किया था लेकिन फिर भी देश में कई जगहों पर आंदोलन के चलते तोड़-फोड़ और हिंसा हुई।

भारत छोड़ो आंदोलन के शुरू होते ही गांधी, नेहरू, पटेल, आजाद समेत कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेज इस आंदोलन से इतना ज्यादा डर गए थे कि उन्होंने एक भी नेता को नहीं बख्शा था। उनका सोचना था कि नेताओं को गिरफ्तार करने से आंदोलन ठंडा पड़ जाएगा। लेकिन फिर इस आंदोलन में पूरा देश शामिल हो गया था। गांधी जी ने ग्वालिया टैंक मैदान से कहा था कि, ‘वो एक मंत्र देना चाहते हैं जिसे आप सभी लोग अपने दिल में उतार लें और वो मंत्र करो या मरो था।’

सभी बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जनता ने आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ले ली। जब ये आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा रूप लेने लगा तो अंग्रेजों को लगने लगा कि अब उनका सूरज अस्त होने वाला है। इसके 5 साल बाद यानी 15 अगस्त 1947 को वो दिन आ ही गया जब अंग्रेजो ने भारत को छोड़ दिया। इस दिन को हर वर्ष ‘अगस्त क्रांति दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन अपने प्राणों की आहुति देने वाले क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। साथ ही बापू द्वारा दी गई शिक्षाओं को भी याद किया जाता है।

 

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