बुढ़ापे में माता-पिता को घर से न निकालें, यह बात बच्चों को सिखा रहे बुजुर्ग

चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र में स्थित वृद्धाश्रम “अपना घर” में रहने वाले बुजुर्ग हर गुरुवार को नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने के लिए बच्चों की पाठशाला लगाते हैं। इसकी खास बात यह है कि इसमें छह से 16 साल तक के बच्चों को किताबी ज्ञान नहीं बल्कि समाज, परिवार और उससे जुड़े नैतिक मूल्य सिखाए जाते हैं। इसमें ऐसे बुजुर्ग, जिन्हें बेटे-बेटियों और बहुओं ने घर से निकाल दिया है, वे बच्चों को अपनों से दूर होने का दर्द बताते हैं।

वे बच्चों को समझाते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए बुढ़ापे में माता-पिता को घर से निकाल देना  बहुत ही दुखदायी है। इस खास पाठशाला का उद्देश्य समाज में आए नकारात्मक बदलाव को रोकना है, जिससे बच्चे बड़े होकर अपने माता-पिता का सम्मान करें और उन्हें घर से निकालकर वृद्धाश्रम में न छोड़ें।

“अपना घर” में करीब 20 साल से रहे बुजुर्ग प्रेम नारायण सोनी और साधना पाठक ने मीडिया को बताया कि हमने अपने बच्चों की बेहतर ढंग से देखभाल की। उन्हें पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया, लेकिन जब हम बूढ़े हो गए तो उन्होंने हमें घर से निकाल दिया और यहां छोड़ दिया। बुढ़ापे में ऐसी स्थिति किसी के भी साथ न बने, इसलिए नई पीढ़ी के बच्चों की बाल चौपाल लगा रहे हैं, जिससे बच्चे संस्कारवान बनें और जन्म देने वाले माता-पिता का सम्मान करें। उन्हें बेसहारा न करें। उनकी आंखों में आंसू न आने दें।

नैतिक मूल्यों की दी जाती है शिक्षा

आश्रम में 24 बुजुर्ग हैं। इनमें 12 महिलाएं व 12 पुरुष हैं। पाठशाला में सभी बुजुर्ग उपस्थित रहते हैं। यहां आने वाले 60 से 70 बच्चों के साथ खो-खो, सांप-सीढ़ी, कैरम, सितोलिया सहित अन्य परंपरागत खेल भी खेले जाते हैं। इसी के साथ बच्चों को जीवनभर माता-पिता का सम्मान करना, उनकी बात मानना, बुढ़ापे में उनका सहारा बनने के बारे में बताते हैं। इतना ही नहीं, सप्ताह में किसी दिन बच्चों के घर भी जाते हैं, उनके माता-पिता से बच्चों में आए बदलाव के बारे में पूछते हैं। माता-पिता से भी कहते हैं कि बच्चों को साथ तालमेल बैठा कर चलें। सराहनीय यह भी है कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद आश्रम के बुजुर्ग समाज में बदलाव लाने के लिए नई पीढ़ी के बच्चों की पाठशाला लगाते हैं।

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