बिहार चुनाव: 11 साल पहले बीजेपी ने दिया था गच्चा, अब जेडीयू ने भी दिया पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय को झटका

चैतन्य भारत न्यूज

पटना. बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने चुनाव से ठीक पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर सियासी किस्मत आजमाने के लिए जनता दल यूनाइटेड (JDU) का दामन थामा। लेकिन अब उन्हें बड़ा झटका लगा है। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में उन्हें टिकट नहीं मिला है। बता दें बीजेपी से चुनावी मैदान में उतरना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। बीजेपी के बाद जेडीयू ने उन्हें गच्चा दे दिया है।

बता दें उनके बक्सर की किसी सीट से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का प्रत्याशी होने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन प्रत्याशियों की लिस्ट (List of Candidates) में उनका नाम नहीं है। इसके बाद उन्होंने फेसबुक (Facebook) पर शुभचिंतकों के नाम से एक भावुक पोस्ट लिखा है। उन्होंने लिखा, ‘अपने अनेक शुभचिंतकों के फोन से परेशान हूं, मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूं। मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूंगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा। हताश निराश होने की कोई बात नहीं है। धीरज रखें। मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है। मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूंगा। कृपया धीरज रखें और मुझे फोन नहीं करे। बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है।’

बक्सर का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी लिखा है कि, ‘अपनी जन्मभूमि बक्सर की धरती और वहां के सभी जाति मजहब के सभी बड़े-छोटे भाई-बहनों माताओं और नौजवानों को मेरा पैर छू कर प्रणाम! अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें।’

बीजेपी ने 2009 में निराश किया था

गुप्तेश्वर पांडेय ने 11 साल पहले भी राजनीतिक मैदान में किस्मत आजमाने के लिए 2009 में वीआरएस लिया था। उस समय भी उनके लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज थीं। कहा जाता है कि गुप्तेश्वर पांडे बिहार की बक्सर लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्हें उम्मीद थी कि बक्सर से बीजेपी के तत्कालीन सांसद लालमुनि चौबे को पार्टी दोबारा से प्रत्याशी नहीं बनाएगी। ऐसे में वह पुलिस की नौकरी से इस्तीफा देकर सियासत में खुद को सेट करने में लगे थे। लेकिन गुप्तेश्वर पांडे के नाम की घोषणा होती उससे पहले ही बीजेपी नेता लालमुनि चौबे ने बागी रुख अख्तियार कर लिया। इससे बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए लालमुनि चौबे को ही मैदान में उतारने का फैसला किया। जब पांडे के सभी सियासी अरमानों पर पानी फिर गया तो इसके बाद वह दोबारा से पुलिस सर्विस में वापसी कर गए थे।

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