मोदी…मुस्लिम और महिला वोटर, बिहार में NDA की जीत के ये हैं तीन कारण

चैतन्य भारत न्यूज

बिहार में एक बार फिर एनडीए की अगुवाई में सरकार बनने जा रही है। देर रात आए नतीजों के बाद जीत की तस्वीर साफ हो गई। राज्य में सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 243 सीटों में से 125 सीटों पर जीत प्राप्त कर बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया। वहीं, युवा तेजस्वी यादव की अगुवाई में लड़ा महागठबंधन जादुई नंबर पाने से चूक गया। बिहार में एनडीए की इस अप्रत्याशित जीत के लिए तीन एम फैक्टर सामने आए हैं, जिनके दम पर फिर सरकार बनती दिख रही है।

पहला फैक्टर: M से मोदी

तमाम सर्वे में इस बार दिख रहा था कि महागठबंधन एकतरफा जीत हासिल कर लेगा। वहीं, नीतीश कुमार के प्रति जनता में गुस्सा था। लेकिन जब बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की ओर से मोर्चा संभाला तो हवा का रुख बदलना शुरू हुआ। पीएम मोदी ने करीब एक दर्जन सभाएं की, कई रैलियों में वो नीतीश कुमार के साथ भी नज़र आए। पीएम ने लगातार नीतीश की तारीफ की, लोगों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें नीतीश सरकार की जरूरत है। इसके अलावा केंद्र की योजनाओं का गुणगान हो, राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर विपक्ष पर वार करना हो या फिर राजद के जंगलराज का जिक्र कर तेजस्वी पर निशाना साधना हो, पीएम मोदी ने अकेले दम पर एनडीए के प्रचार को आगे बढ़ाया। जिसने हार और जीत का अंतर तय कर दिया, नतीजों ने भी दिखाया कि जहां जदयू को सीटों में घाटा हुआ वहां पर बीजेपी की बढ़त ने एनडीए को बहुमत तक पहुंचा दिया।

दूसरा फैक्टर: M से महिलाएं

एनडीए की जीत का एक अहम फैक्टर बिहार की महिला वोटर रहीं। बिहार में महिला वोटरों को नीतीश कुमार का पक्का मतदाता माना जाता रहा है, जो हर बार साइलेंट तरीके से नीतीश के पक्ष में वोट करता है। यही नतीजा इस बार के चुनाव में भी दिख रहा है। इसके अलावा महिलाओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कई योजनाओं पर विश्वास 2019 के लोकसभा चुनाव में भी दिखा और अब फिर इसका असर पहुंचा है। केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना, शौचालयों का निर्माण, पक्का घर, मुफ्त राशन, महिलाओं को आर्थिक मदद जैसी कई ऐसी योजनाएं हैं जिनका सीधा लाभ महिलाओं को होता है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा की गई शराबबंदी के पक्ष में भी बिहार की महिलाएं बड़ी संख्या में नज़र आती हैं। ऐसे में फिर एक बार एनडीए की जीत में 50 फीसदी आबादी निर्णायक भूमिका निभाते नज़र आए हैं।

तीसरा फैक्टर: M से मुस्लिम

बिहार में मुस्लिम मतदाता मुख्य रूप से राजद के साथ जुड़ता रहा है और यही कारण है कि राजद का M+Y समीकरण निर्णायक माना जाता रहा है। राज्य में करीब 17 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं, जो हार जीत का अंतर पैदा कर सकते हैं। लेकिन इस बार यही वोटर अलग-अलग हिस्सों में बंटते हुए नज़र आए, जिसका फायदा एनडीए को हो गया। इस बार मुस्लिम मतदाताओं के सामने कई तरह के ऑप्शन थे, राजद की अगुवाई में महागठबंधन चुनाव लड़ रहा था तो वहीं बिहार में AIMIM ने भी बड़ी जीत हासिल की। इसके अलावा बसपा जैसी पार्टियां भी अपने क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों को लुभा पाईं। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM इस बार चुनाव में पांच सीटों पर जीत हासिल कर पाई, जिसे राजद का बड़ा वोट माना जा रहा है। और इन्हीं सीटों ने महागठबंधन की जीत में रोड़ा अटका दिया।

बता दें बिहार में इस बार NDA को 125 सीट मिली हैं, जिनमें से बीजेपी के खाते में 74, जदयू के खाते में 43, विकासशील इंसान पार्टी के खाते में 4 और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के खाते में 4 सीटें गई हैं। दूसरी ओर महागठबंधन में राजद को कुल 75, कांग्रेस को 19 और लेफ्ट पार्टियों को मिलाकर 16 सीटें मिल पाई हैं।

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