22 जवान को शहीद करने के बाद सरकार से बातचीत करना चाहते हैं नक्सली, लापता जवान को छोड़ने के लिए रखी यह शर्त

चैतन्य भारत न्यूज

छत्तीसगढ़ में हमले के बाद नक्सली जम्मू निवासी सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह मन्हास को अगवा कर ले गए हैं। नक्सलियों ने बयान जारी किया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की तरफ से प्रेस नोट जारी कर हमले की जिम्मेदारी ली गई है। उन्होंने अपने बयान में इस बात की भी पुष्टि की है कि, लापता सीआरपीएफ जवान उनके कब्जे में हैं। साथ ही नक्सलियों ने बयान में कहा है कि, सरकार मध्यस्थों का ऐलान करें तो वो जवान को उन्हें सौंप देंगे।

राकेश्वर की मां, बहन और पत्नी भगवान से यही दुआ कर रहे हैं कि वह सकुशल घर लौट आएं। राकेश्वर की पत्नी मीनू चिब का कहना है कि, ‘शनिवार 3 मार्च को अंतिम बार पति से बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि वह एक ऑपरेशन पर जा रहे हैं। अपने साथ खाना पैक कर लिया है। लौट कर फोन करेगा, लेकिन पिछले तीन दिन से उनका फोन रिसीव नहीं हो पा रहा। रिंग जाती है, लेकिन कोई फोन नहीं उठाता।’

बता दें माओवादी ने अपने प्रेस नोट में चार नक्सलियों के मारे जाने की भी पुष्टि की है। साथ ही शहीद जवानों के परिवारों के प्रति भी नक्सलियों ने खेद प्रकट किया है। यह भी पता चला है कि नक्सलियों ने इस हमले में 14 हथियार और दो हज़ार से अधिक कारतूस भी लूटे हैं। नक्सलियों ने लूटे हुए हथियारों की तस्वीर भी जारी की है।

गौरतलब है कि पिछले शनिवार को नक्सलियों से एनकाउंटर में सुरक्षाबल के 22 जवान शहीद हो गए थे। तब से ही एक जवान राकेश्वर सिंह इस एनकाउंटर के बाद से लापता थे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि वह नक्सलियों के कब्जे में हैं। अब यह शक सच होता नजर आया है।

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