जयंती : आखिर क्यों आदिवासियों के बीच भगवान की तरह पूजे जाते हैं बिरसा मुंडा? जानिए उनसे जुड़ी कुछ खास बातें

birsa munda jayanti,birsa munda jayanti 2019,birsa munda birthday,birsa munda ka janmdin,koun the birsa munda

चैतन्य भारत न्यूज

देश 15 नवंबर को यानी आज 19वीं सदी के प्रमुख आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा की जयंती मना रहा है। भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे नायक थे जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया।



birsa munda jayanti,birsa munda jayanti 2019,birsa munda birthday,birsa munda ka janmdin,koun the birsa munda

15 नवंबर 1875 को झारखंड के आदिवासी परिवार सुगना और करमी के घर जन्मे बिरसा मुंडा ने साहस की स्याही से पुरुषार्थ के पृष्ठों पर शौर्य की शब्दावली रची। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सकला से प्राप्त की जहां उन्होंने अपने गुरु जयपाल नाग से ज्ञान प्राप्त किया। जर्मन मिशनरी स्कूल में दाखिला लेने के लिए बिरसा मुंडा ने ईसाई धर्म अपना लिया हालांकि कुछ ही सालों बाद उन्होंने वो स्कूल छोड़ दिया। इसके पीछे कारण ये था कि ईसाई स्कूल में आदिवासी संस्कृति का मजाक बनाया जाता था जो बिरसा मुंडा को पसंद नहीं था।

birsa munda jayanti,birsa munda jayanti 2019,birsa munda birthday,birsa munda ka janmdin,koun the birsa munda

बिरसा मुंडा ने किसानों का शोषण करने वाले जमींदारों के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा भी लोगों को दी। उनका संघर्ष एक ऐसी व्यवस्था से था, जो किसानी समाज के मूल्यों और नैतिकताओं का विरोधी था। बिरसा की इस क्रांतिकारी सोच को देखकर ब्रिटिश सरकार भयभीत हो गई और उसने उन्हें लोगों की भीड़ जमा करने से रोका। बिरसा का कहना था कि, ‘मैं तो अपनी जाति को अपना धर्म सिखा रहा हूं।’

birsa munda jayanti,birsa munda jayanti 2019,birsa munda birthday,birsa munda ka janmdin,koun the birsa munda

इस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करके दो साल के लिए हजारीबाग जेल में डाल दिए गए। बाद में उन्हें इस चेतावनी के साथ छोड़ा गया कि वे कोई प्रचार नहीं करेंगे। लेकिन बिरसा नही माने और उन्होंने जेल से छूटने के बाद अपने अनुयायियों के दो दल बनाए। एक दल मुंडा धर्म का प्रचार करने लगा और दूसरा राजनीतिक कार्य करने लगा। नए युवक भी भर्ती किए गए। इस पर सरकार ने फिर उनकी गिरफ्तारी का वारंट निकाला, लेकिन बिरसा पकड़ में नहीं आए। बिरसा सही मायने में पराक्रम और सामाजिक जागरण के धरातल पर तत्कालीन युग के एकलव्य और स्वामी विवेकानंद थे।

birsa munda jayanti,birsa munda jayanti 2019,birsa munda birthday,birsa munda ka janmdin,koun the birsa munda

ब्रिटिश हुकूमत ने इसे खतरे का संकेत समझकर बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। 9 जून 1990 को रांची की जेल में बिरसा मुंडा की रहस्यमयी हालत में मौत हो गई। केवल 25 साल में बिरसा मुंडा ने बिहार, झारखंड और ओडिशा में अपनी ऐसी पहचान बनाई की आज भी यहां की आदिवासी जनता बिरसा मुंडा को भगवान की तरह याद करती है। बिरसा मुंडा की गणना महान देशभक्तों में की जाती है।

Related posts