जन्मदिन विशेष: भारत की इस बहादुर बेटी को पाकिस्तान ने भी किया था सलाम, अकेले आतंकियों का सामना कर 360 लोगों की बचाई थी जान

चैतन्य भारत न्यूज

नाजुक, कोमल, छुई-मुई और खूबसूरत होने से कोई महिला कमजोर नहीं आंकी जा सकती। यह कोई पैमाना नहीं है महिलाओं के आंकने का और इसे साबित किया था एयर-अटेंडेंट नीरजा भनोट ने जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर अकेले आतंकवादियों का सामना किया और 360 लोगों की जान बचा ली। आज नीरजा भनोट का जन्मदिन है और पूरा देश उनके इस बलिदान को याद कर रहा है।

कई बड़ी कंपनियों के विज्ञापन में दिखीं

नीरजा का जन्म 7 सितंबर, 1963 को चंडीगढ़ में हुआ था और 5 सितंबर, 1986 को एक प्लेन हाइजैक में पैसेंजर्स की जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी जान दे दी थी। उन्हें प्यार से उनके माता-पिता ‘लाडो’ पुकारा करते थे और अपने बहादुरी और साहसी कारनामे की बदौलत उन्होंने साबित कर दिया की वे सबकी चहेती हैं। नीरजा की पढ़ाई पहले चंडीगढ़ और फिर मुंबई में हुई। मुंबई में पढ़ाई के दौरान ही उन्हें मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे। नीरजा वीको, गोदरेज डिटर्जेंट, वैपरेक्स और बिनाका टूथपेस्ट जैसी कई बड़ी कंपनियों के विज्ञापनों में नजर आ चुकी हैं।

घरेलू हिंसा का शिकार हुई थीं नीरजा

महज 19 साल की उम्र में नीरजा की शादी एक मरीन इंजीनियर से कर दी गई थी। शादी के बाद वह शारजाह, यूएई शिफ्ट हो गईं। वहां उन्हें कई बार घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। दो महीने तक ये सब सहने के बाद नीरजा ने अपने पति को छोड़ दिया और वापस मुंबई आ गईं। इसके बाद उन्होंने फ्लाइट अटेंडेंट का करियर चुना।

5 सितंबर 1986 की कहानी

5 सितंबर 1986 को पैन एम (Pan Am) फ्लाइट की अटेंडेंट नीरजा थीं। टिकट सारे बुक थे और लोग इस विमान से मुंबई से अमेरिका जा रहे थे। पाकिस्तान के कराची में विमान को चार हथियार बंद लोगों ने हाइजैक कर लिया। उनकी कोशिश अमेरिकियों को निशाना बनाने की थी। जब पैन एम उड़ान-73 को कराची में हाइजैक किया गया तब विमान में कुल 380 यात्री थे। हाइजैकर विमान को इजरायल ले जाना चाहते थे और उनकी मंशा किसी बिल्डिंग से क्रैश कराने की थी। हाईजैक का पता चलते ही नीरजा ने कॉकपिट में बैठे पायलट्स को अलर्ट किया।

नीरजा ने चालाकी से काम लिया

कॉकपिट के इमरजेंसी गेट से तुरंत कॉकपिट क्रू बचकर निकल गए। 17 घंटे तक नीरजा व क्रू के अन्य सदस्य ने यात्रियों को बचाने का पूरा प्रयास किया। विमान में सवार कुल 41 अमेरिकियों में से दो की जान हाइजैकर्स ने ले ली। हाइजैकर्स ने नीरजा से कहा कि, वे सभी यात्रियों का पासपोर्ट जमा करें ताकि अमेरिकियों की पहचान की जा सके। लेकिन नीरजा ने काफी चालाकी से सभी पासपोर्ट छिपा दिए।

आखिर तक लड़ती रहीं नीरजा

हाइजैक की सूचना मिलते ही पायलट और को-पायलट जान बचाकर भाग निकले। लेकिन नीरजा विमान में सबसे आखिर तक टिककर दूसरों की जान बचाती रहीं। इस हादसे में उनकी जान चली गई। आत्मविश्वास के साथ खूबसूरत नीरजा ने साहस और बहादुरी का परिचय दिया। 7 सितंबर, 23वें जन्मदिन के कुछ घंटे ही बचे थे कि नीरजा को आतंकियों ने गोलियों से छलनी कर दिया।

पाकिस्तान ने भी नीरजा को नवाजा

हीरोइन ऑफ हाइजैक नीरजा को पाकिस्तान ने भी सम्मानित किया और उन्हें ‘तमगा-ए-इंसानियत’ से नवाजा। अमेरिकी सरकार की तरफ से भी ‘जस्टिस फॉर क्राइम अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। वहीं भारत में अशोक चक्र से सम्मानित होने वाली 23 साल की नीरजा सबसे युवा शख्स बनीं। वर्ष 2004 में नीरजा के साहस और बहादुरी को सलाम करते हुए इंडियन पोस्टल सर्विस ने एक स्टांप जारी किया। मुंबई के घाटकोपर में एक चौक है जिसे ‘नीरजा भनोट चौक’ का नाम दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘नीरजा को हीरोइन ऑफ हाइजैक’ बोला जाता है।

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