BSF स्थापना दिवस : आखिर क्यों हुआ था विश्व की सबसे बड़ी सीमा रक्षक फोर्स का गठन? जानें पूरी कहानी

border security force day

चैतन्य भारत न्यूज

देश की सुरक्षा करने वाली बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी बीएसएफ का आज स्थापना दिवस है। बीएसएफ को आज 55 साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ नेताओं समेत पूरा देश सैन्य बल को शुभकामनाएं दे रहा है।



कब हुई थी बीएसएफ की स्थापना

देश के उत्कृष्ट बलों में से एक बीएसएफ की स्थापना 1 दिसंबर, 1965 को मौलिक रूप से पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को सुरक्षित बनाने के लिए की गई थी। इसके गठन से पहले इन सीमाओं पर संबंधित राज्य की सशस्त्र पुलिस तैनात थी। बीएसएफ एक अर्धसैनिक बल है। साथ ही यह विश्व की सबसे बड़ी सीमा रक्षक फोर्स भी है। यह बल केंद्र सरकार के ‘गृह मंत्रालय’ के नियंत्रण के अंतर्गत आता है। इस फोर्स में लगभग 185 बटालियन और 2.57 लाख से ज्यादा कर्मी तैनात हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य देश की सीमाओं की रक्षा करना है।

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क्यों हुआ था बीएसएफ का गठन

साल 1962 में भारत-चीन युद्ध हुआ था, जिसे हमारा देश हार चुका था। ये वो दौर था जब सीमा सुरक्षा के लिए फौज का गठन नहीं हुआ था। उस समय सूबें की पुलिस ही अपने-अपने राज्यों से लगे बॉर्डर की रखवाली करती थीं। चीन से लड़ाई शुरू होने के पांचवे दिन सीमा सुरक्षा के लिए बड़ी पहल की गई, जिसके चलते भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का गठन हुआ। लेकिन फिर भी हम युद्ध हार चुके थे। चीन के बाद भारत को पाकिस्तान से खतरा बना हुआ था।

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पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा का जिम्मा तो राज्यों पर ही था, जिसे जरुरत थी एक अलग फोर्स की। उस समय पाकिस्तान भी बगावत का रवैया अपना चुका था। साल 1965 में पाकिस्तान ने जंग छेड़ दी थी। जिस तरह गुजरात के कच्छ में पाकिस्तानी फौजें घुसीं थी, उसी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय हमारी सरहद की हालत बेहद नाजुक थी। हालांकि फिर भी हमारी सेना ने किसी तरह यह जंग जीत ली।

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देश के अंदर भी बीएसएफ करती है लोगों की रक्षा

इस युद्ध के खत्म हो जाने के बाद केंद्र सरकार ने एक केंद्रीय एजेंसी के गठन का फैसला किया, जिसकी जिम्मेदारी सिर्फ सीमाओं की रक्षा की थी। फिर 1 दिसंबर 1965 को सीमा सुरक्षा बल यानी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स बनाया गया। इस फाॅर्स के बन जाने के बाद सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्यों की पुलिस के पास नहीं, एक केंद्रीय बल के पास होती है, जो सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। बीएसएफ न सिर्फ सीमा पर बल्कि देश के अंदर भी देशवासियों की रक्षा करती आई है। हमारे देश में ऐसे कई क्षेत्र हैं, जो नक्सल प्रभावित है, लेकिन इन क्षेत्रों में भी बीएसएफ ने बड़े पैमाने पर जनता के मन से नक्सलियों का डर कम किया है। बीएसएफ ने लोगों के मन में बसे नक्सलियों के डर को उखाड़ फेंका है।

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