यूनिवर्सिटीज में अब इमोजी की होगी पढ़ाई, भावनाएं व्यक्त करने के लिए शब्दों से ज्यादा हो रहा इसका इस्तेमाल

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चैतन्य भारत न्यूज

लंदन. समय परिवर्तन के साथ-साथ पढ़ाई-लिखाई के तरीकों में भी बदलाव आने लगा है। इन दिनों लोग लंबी-लंबी पंक्तियां या वाक्यों को लिखकर अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं करना चाहते हैं। या फिर ऐसा भी कह सकते हैं कि लोग अपना समय भी बचाना चाहते हैं। उदाहरण के लिए किसी सोशल मीडिया पोस्ट को ही देख लीजिए। इसमें कमैंट्स से ज्यादा तो रिएक्शंस होते हैं। चाहे किसी बात का जवाब देना हो या आपकी तारीफ ही क्यों न करना हो, लोग ज्यादातर लिखने के बजाय इमोजी का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। इमोजी के बढ़ते चलन को देखते हुए ब्रिटेन में कई यूनिवर्सिटी ने अपने कोर्स में इमोजी को भी शामिल कर लिया है। यानी अब तक विद्यार्थियों को इमोजी के बारे में पढ़ाया जाएगा।


शब्दों से ज्यादा इमोजी का इस्तेमाल

वैसे यह कहना गलत नहीं होगा कि धीरे-धीरे इमोजी हमारी भाषा बनती जा रही है। दुनियाभर में इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि अब 17 जुलाई को ‘वर्ल्ड इमोजी डे’ भी मनाया जाता है। लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्दों से ज्यादा इमाेजी का इस्तेमाल करने लगे हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, दुनियाभर में रोजाना करीब 90 करोड़ लोग अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर 3,178 तरह के इमोजी का इस्तेमाल करते हैं। इसी ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए अब ब्रिटेन की किंग्स कॉलेज लंदन, एडिनबर्ग, कार्डिफ समेत अन्य यूनिवर्सिटीज व कॉलेजों में अलग-अलग पाठ्यक्रमों में इमोजी और कार्टून्स की पढ़ाई को शामिल किया गया है।

शोक जताने के लिए हो रहा इमोजी का इस्तेमाल

ब्रिटेन की ओपन यूनिवर्सिटी के डॉ. फिलिप सर्जेंट ने बताया कि, ‘बात 2015 की है। जब ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी को वर्ड ऑफ द ईयर चुनना था। लेकिन शब्द चुनने के बजाए ऑक्सफोर्ड ने ‘खुशी वाले आंसू’ (Face with tears of Joy) को डिक्शनरी में जगह दी।’ उन्होंने बताया कि, ‘इमोजी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोग अब शोक जताने के लिए भी इमोजी का इस्तेमाल करने लगे हैं।’ चाहे बात किसी राजनीतिक मुद्दे की हो या फिर सामाजिक मुद्दे, हर विषय पर इमोजी बन गए हैं और लोग तेजी के साथ इस्तेमाल करने लगे हैं।

बच्चों पर इमोजी का दुष्प्रभाव

डॉ. सर्जेंट के मुताबिक, ‘आज से करीब 10 साल पहले से ही चिंता जताई जाने लगी थी कि इमोजी भाषा को बर्बाद कर रही है। लेकिन इसका विकास क्रम देखें कि 10 साल पहले सिर्फ 625 इमोजी प्रचलन में थी और अब 3 हजार से ज्यादा।’ हालांकि, इमोजी का दुष्प्रभाव बच्चों के बीच ज्यादा देखा जा रहा है। इमोजी के इस्तेमाल से उनकी भाषाई पकड़ और व्याकरण कमजोर हाे रही है। अपनी बात समझाने और सही तरीके से कहने की क्षमता कमजोर हो रही है।

भारत में इन पांच इमोजीज का सबसे ज्यादा इस्तेमाल

एक सर्वे के मुताबिक, भारत में सबसे ज्यादा ‘खुशी के आंसू वाला हंसता चेहरा’ की इमोजी सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। इसके अलावा आंखों में दिल के साथ मुस्कुराता चेहरा, मुस्कुराता चेहरा (Smiley), दिल और नमस्कार वाले इमोजी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं।

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