इंश्योरेंस के डेढ़ करोड़ रुपए हड़पने के लिए माता-पिता ने गोद लिए बेटे की करवाई हत्या, फिर भी नहीं हो रही सजा

चैतन्य भारत न्यूज

ब्रिटेन से हाल ही में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाले एक दंपत्ति ने पहले तो भारत के एक बच्चे को गोद लिया और फिर उन्होंने इंश्योरेंस के डेढ़ करोड़ रुपए की रकम हासिल करने के लिए उसकी हत्या करवा दी। फिर भी दंपत्ति कानून से बच निकले और वह खुलेआम घूम रहे हैं। भारत सरकार ने दंपत्ति के प्रत्यर्पण की कोशिश की थी, लेकिन यूरोप के मानवाधिकार कानूनों की वजह से प्रत्यर्पण नहीं हो पाया।

बीम की रकम हड़पने को रची साजिश

हीथ्रो एयरपोर्ट की पूर्व कर्मचारी 55 वर्षीय आरती धीर और 31 वर्षीय उनके पति कवल रायजादा ने £150,000 पाउंड (1.3 करोड़ रुपए) की बीमा राशि हथियाने के लिए 11 वर्षीय गोपाल सेजानी कथित रूप से हत्या कर दी थी। बता दें 2015 में गुजरात के मलिया हटिना गांव के अनाथ बच्चे गोपाल सेजानी को गोद लेने का वादा किया। गोद लेने की प्रक्रिया खत्म होने के कुछ ही दिन बाद कपल ने बच्चे के लिए ‘वेल्थ बिल्डर’ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी। फिर उन्होंने इस पालिसी का पैसा हथियाने के लिए गोद लिए बच्चे की हत्या कर दी। इसके बाद ब्रिटेन भाग गए थे।

ऐसे की हत्या

गोद लिए जाने के दो साल बाद 2017 में 11 साल का लड़का गोपाल अपने एक रिश्तेदार के साथ राजकोट गया था। वापसी के दौरान गोपाल और उसके रिश्तेदार पर दो लोगों ने चाकू से हमला कर दिया। हमले की वजह से गोपाल और उसके रिश्तेदार हरसुखभाई कारदानी की मौत हो गई।

साथी ने कबूली हत्या की बात

दंपत्ति के ही एक साथी नीतीश मुंद ने माना था कि, कवल रायजादा ने उन्हें भारत में हत्या की योजना बनाने के लिए पैसे दिए थे। फिलहाल नीतीश मुंद जेल में बंद है। वहीं, ब्रिटेन के चीफ मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बुथनॉट ने भी अपने फैसले में कहा था कि इस मामले में परिस्थितिजन्य सबूत मजबूत हैं जो बताते हैं कि कपल ने अन्य लोगों के साथ मिलकर अपराध को अंजाम दिया।

लंदन कोर्ट ने क्या कहा?

लंदन की अदालत ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कहा था कि, दंपत्ति को भारत को प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा। उन्हें प्रत्यर्पित करना मानवाधिकारों का हनन होगा। ब्रिटेन के मुख्य मजिस्ट्रेट ने अपने फैसले में कहा था कि, धीर और रायजादा को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त सुबूत हैं, लेकिन उन्हें प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता है। वे लंदन की सड़कों पर बेखौफ घूम सकते हैं। हालांकि, न्यायमूर्ति लॉर्ड जस्टिस डिंगेमन्स ने यह भी कहा था कि, ‘भारत में दोहरे हत्याकांड में दोषी पाए जाने पर उन्हें बिना पैरोल के आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। यही उनके प्रत्यर्पण नहीं करने का आधार है। यह अमानवीय और अपमानजनक होगा। इसके साथ ही यह मानवाधिकारों पर यूरोपीय कन्वेंशन के अनुच्छेद-3 का उल्लंघन होगा। डिंगेमन्स ने प्रत्यर्पण को गैरकानूनी बताया।

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