जेल में जन्में शबनम के बेटे ने राष्‍ट्रपति से कहा- ‘अंकल जी मेरी मां को माफ कर दीजिए’, शबनम बोली- मैं बुरी मां हूं मुझे कभी याद मत करना

चैतन्य भारत न्यूज

आजाद भारत में पहली बार फांसी की सजा पाने वाली महिला शबनम को लेकर हर चर्चा हो रही है। शबनम के बेटे मुहम्मद ताज ने अपनी मां के लिए माफ़ी की गुहार लगाई है। बता दें राष्ट्रपति कोविंद पहले ही शबनम की दया याचिका ख़ारिज कर चुके हैं। इसके बाद शबनम के 12 साल के बेटे ताज ने कहा कि, ‘राष्ट्रपति अंकल जी, मेरी मां को माफ कर दो।’

शबनम के दोस्त उस्मान सैफी ने ताज को गोद ले लिया था। कुछ दिन पहले ही उस्मान सैफी ताज को जेल में बंद शबनम से मिलाने के लिए रामपुर जेल ले गये थे। उस्मान सैफी ने बताया कि, ‘जब शबनम ने अपने बेटे को देखा तो वो फफक कर रोने लगी और काफी देर तक अपने बेटे ताज से लिपटी रही। साथ ही वह अपने बेटे को बार बार चुम रही थी।’ शबनम बार बार अपने बेटे से कह रही थी कि, ‘पढ़ लिख कर अच्छा इंसान बनना, मैं बुरी मां हूं मुझे कभी याद मत करना।’ मुलाकात के दौरान शबनम ने बेटे को टॉफी और कुछ रुपए भी दिए।

पूरे परिवार को कुल्हाड़ी से काट दिया

मरोहा की शबनम के परिवार में टीचर पिता शौकत अली, मां हाशमी, भाई अनीस, राशिद, भाभी अंजुम और दस महीने का भतीजा अर्श शामिल थे। शबनम और गांव के ही आठवीं पास युवक सलीम के बीच प्रेम संबंध था जो उसके पिता को पसंद नहीं था। वे दोनों शादी करना चाहते थे लेकिन शबनम सैफी और सलीम पठान बिरादरी से था। इसके चलते शबनम के परिवार ने शादी से इनकार कर दिया था। फिर शबनम पूरे परिवार को नींद की गोलियां खिलाने लगी। जब परिवार सो जाता तो घर की छत के रास्ते से रोज सलीम मिलने आता था। एक फिन दोंनों ने ऐसा फैसला लिया जो दिल दहलाने वाला था। 14 अप्रैल, 2008 की रात को शबनम ने प्रेमी सलीम को घर बुलाया और परिवार को नींद की गोलियां खिलाकर सुला दिया। रात में शबनम व सलीम ने मिलकर नशे की हालत में सो रहे पिता शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस, राशिद, भाभी अंजुम, फुफेरी बहन राबिया और दस माह के भतीजे अर्श का कुल्हाड़ी से गला काट कर मौत की नींद सुला दिया।

जेल में ही दिया था बेटे को जन्म

जिस वक्त शबनम ने सभी की हत्या की थी तब वह वह दो महीने की गर्भवती थी। शबनम ने जेल में ही ताज को जन्म दिया था। शबनम के बेटे को गोद लेने वाले उस्मान सैफी ने कहा कि ताज को गोद लेने के लिए उन्हें काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी, इसके लिए जेल में उन्होंने शबनम से 24 बार मुलाकात की थी। शबनम और उस्मान सैफी एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। शबनम उस्मान से दो साल सीनियर थी। उस्मान को काफी कोशिशों के बाद बच्चे ताज की परवरिश की जिम्मेदारी म‍िल पाई।

 

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