रेलवे बोर्ड में हुआ बड़ा बदलाव, सेवाओं का होगा एकीकरण

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. मंगलवार को मोदी कैबिनेट ने रेलवे बोर्ड के फंक्शनल लेवल पर पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। बता दें रेलवे बोर्ड में अब तक चेयरमैन के अलावा 8 सदस्य होते थे, जो विभिन्न सर्विसेज से आते थे। लेकिन अब सभी का विलय करके इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (IRMS) बनाने की मंजूरी दी गई है। अब रेलवे बोर्ड में आठ की जगह सिर्फ चार सदस्य होंगे। चेयरमैन को चेयरमैन-सह-सीईओ के नाम से जाना जाएगा।



मंगलवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि, साल 1905 से भारतीय रेलवे में आठ अलग-अलग सेवाओं के जरिए काम होता आया है। लेकिन समय के साथ इससे विभागों के बीच वर्चस्व की लड़ाई और गुटबाजी कोे बढ़ावा मिलने से रेलवे की प्रगति बाधित होने लगी। इसलिए अब आठों विभागों का एक सेवा में ही विलय कर दिया गया है। इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (आइआरएमएस) के रूप में नई केंद्रीय सेवा शुरू करने का फैसला लिया गया है।


जानकारी के मुताबिक, अब रेलवे का आकार भी छोटा किया जाएगा। अब इसमें चेयरमैन और सीईओ के अलावा चार कार्यकारी सदस्य इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेशन्स एंड बिजनेस डेवलपमेंट, रोलिंग स्टॉक और फाइनेंस के अलावा कुछ स्वतंत्र और अनुभवी विशेषज्ञ सदस्य रहेंगे। इनके लिए उद्योग, वित्त, अर्थशास्त्र और प्रबंधन का 30 वर्ष का अनुभव जरूरी होगा। इंडियन रेलवे मेडिकल सर्विस (आइआरएमएस) को इंडियन रेलवे हेल्थ सर्विस (आइआरएचएस) के नाम से जाना जाएगा।

चुस्त-दुरुस्त संगठन की आवश्यकता

इन सभी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तेज गति और व्यापक स्तर से युक्त एकीकृत एवं चुस्त-दुरुस्त संगठन की आवश्यकता है। आने वाली चुनौतियों से निपटने और अलग-अलग मौजूदा कठिनाइयों को दूर करने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। दुनियाभर की रेल प्रणालियों, जिनका निगमीकरण हो चुका है, उनके विपरीत भारतीय रेलवे का प्रबंधन सीधे तौर पर सरकार द्वारा किया जाता है। अलग-अलग विभागों जैसे कि यातायात, सिविल, यांत्रिक, विद्युतीय, सिग्नलल एवं दूरसंचार, स्टोरर, कार्मिक, लेखा इत्याखदि में संगठित किया जाता है।

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