बुरी तरह फंसी ‘बबीता जी’, दलित समुदाय के लिए की आपत्तिजनक टिप्पणी, गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज

चैतन्य भारत न्यूज

टीवी सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम अभिनेत्री मुनमुन दत्ता इन दिनों विवादों में हैं। दरअसल, अभिनेत्री ने अपने एक वीडियो में दलित समुदाय के लिए जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया है। एक्ट्रेस के इस कमेंट के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स ने उन्हें घेर लिया है। अभिनेत्री के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है।

इन धाराओं में दर्ज हुई FIR

जानकारी के मुताबिक, मुनमुन के खिलाफ नेशनल अलायंस फॉर शेड्यूल क्लास हयूमन राइट्स के संयोजक रजत कलसन की शिकायत पर थाना शहर हांसी की पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। एफआईआर सेक्शन 153 ए, 295ए भारतीय दंड संहिता व धारा 3(1)(आर), 3(1)(एस), 3(1)(यू) अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज की गई है।

सभी धाराएं गैर जमानती

बता दें जिन धाराओं में मुनमुन दत्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है, वह सारी धाराएं गैर जमानती हैं। इन धाराओं में अग्रिम जमानत का प्रावधान भी नहीं है। लिहाजा यह केस दर्ज होने के चलते मुनमुन दत्ता उर्फ बबीता मुसीबतों में फंसती नजर आ रही हैं।

आपत्तिजनक शब्द का किया था उपयोग

गौरतलब है कि, मुनमुन ने इंस्टाग्राम की एक वल्गर सोसायटी नाम के चैनल पर एक वीडियो डाला था। इसमें वे कह रही थी कि उन्हें यूट्यूब पर आना है तथा वे अच्छा दिखना चाहती हैं। उन… जैसा नहीं दिखना चाहती तथा यह कहकर मुनमुन दत्ता ने अनुसूचित जाति समाज के खिलाफ एक अपमानजनक टिप्पणी कर दी। वीडियो में एक्ट्रेस कह रही हैं कि- ‘लिप टिंट को हल्का सा ब्लश की तरह लगा लिया है क्योंकि मैं यूट्यूब पर आनेवाली हूं और मैं अच्छी दिखना चाहती हूं।’ इसके बाद एक्ट्रेस ने एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि, ‘वे ऐसा नहीं दिखना चाहतीं।’ बबीता द्वारा इतना कहने की ही देरी थी कि एक्ट्रेस पर उनका ये वीडियो वायरल होने लगा। लोगों ने उन्हें जातिसूचक गाली देने के लिए खूब लताड़ा। उन्हें खूब ट्रोल किया जा रहा है।

ट्रोल होने के बाद मांगी माफी

ट्रोल होने के बाद इस वीडियो पर माफी मांगते हुए मुनमुन दत्ता ने बयान भी जारी किया है। उन्होंने लिखा, ‘यह एक वीडियो के संदर्भ में है जिसे मैंने कल पोस्ट किया था, जहां मेरे द्वारा इस्तेमाल किए गए एक शब्द का गलत अर्थ लगाया गया है। यह अपमान, धमकी या किसी की भावनाओं को चोट पहुंचाने के इरादे से कभी नहीं कहा गया था। मेरी भाषा के अवरोध के कारण, मुझे सही मायने में शब्द का मतलब नहीं पता था। एक बार जब मुझे इसका मतलब पता चला तो मैंने तुरंत उस पार्ट को हटा दिया।’

 

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