एवरेस्ट से कम ऊंचाई होने के बावजूद आज तक कोई क्यों न चढ़ सका कैलाश पर्वत? जानिए इससे जुड़ी रहस्यमयी बातें

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चैतन्य भारत न्यूज हर साल 11 दिसंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस’ मनाया जाता है। इस अवसर पर आज हम आपको कैलाश पर्वत के बारे में बता रहे हैं, जिसका वर्णन धर्म ग्रंथों में किया गया है। हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत का बड़ा महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव का निवास स्थान भी माना जाता है। आइए जानते हैं इस पर्वत से जुड़ी कुछ रोचक बातें जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। कैलाश पर्वत की ऊंचाई एवरेस्ट से काफी कम है। बावजूद इसके आज तक कोई इंसान कैलाश पर्वत की…

एक अनूठा ‘कल्पवृक्ष’, जिसमें हमारे शरीर में आवश्यक 8 अमीनो एसिड में से 6 पाए जाते हैं

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चैतन्य भारत न्यूज सागर. कल्पवृक्ष एक विशेष वृक्ष है। पौराणिक धर्म ग्रंथों और हिंदू मान्यताओं के अनुसार, माना जाता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर व्यक्ति जो भी इच्छा करता है, वह पूर्ण हो जाती है। यह दुर्लभ व पौराणिक कल्पवृक्ष मध्यप्रदेश के सागर में भी है। जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में मौजूद दो कल्पवृक्ष अतिक्रमण की जद में आ रहे थे, जिसके तहत उसे काटा जाना था। लेकिन अधिकारियों की सूझबूझ से इन दोनों वृक्षों को एक बार फिर जीवन मिल गया। अधिकारियों ने वृक्षों को ना काटकर निर्माणाधीन…

इस शहर के राजा है प्रभु श्रीराम, कलेक्टर-SP सब करते हैं रिपोर्ट, गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाता है

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चैतन्य भारत न्यूज ओरछा. अयोध्या रामजन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर आने वाले फैसले को मद्देनजर रखते हुए ओरछा के विश्व प्रसिद्ध राम राजा मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। बता दें ओरछा में बने प्रभु श्री राम के मंदिर की विशेष मान्यता है। इस जगह श्री राम को भगवान नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण? ओरछावासी प्रभु श्री राम को भगवान नहीं बल्कि वहां के राजा मानते हैं। शुरुआत से ही यहां राम भगवान का ही शासन चलता है। जानकारी के मुताबिक,…

अहंकारी रावण के ये हैं वो 5 योगदान, जिन्हें बनाया गया धर्मशास्त्र का हिस्सा

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चैतन्य भारत न्यूज लंकापति रावण को सिर्फ उसके अहंकार और बुराइयों ने नष्ट कर दिया, वरना रावण जितना ज्ञानी और कोई नहीं था। रावण की बुराइयों के चलते उसे पूरी दुनिया नकारात्मक छवि से देखती है। लेकिन आपको बता दें कि रावण एक विद्वान और प्रकांड पंडित था और उसने धर्मशास्त्र को भी बहुत कुछ दिया हैं। आइए जानते हैं रावण के वो 5 योगदान के बारे में, जो धर्मशास्त्र का हिस्सा बने। शिव तांडव स्त्रोत लिखा था पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार तो रावण इतना ज्यादा अहंकारी बन…

तेलंगाना के यदाद्री मंदिर का पुनर्निर्माण 1800 करोड़ में, 39 किलो सोना और 1753 टन चांदी से मढ़ी जाएंगी दीवारें

चैतन्य भारत न्यूज हैदराबाद. आंध्रप्रदेश से अलग होने के बाद साल 2014 से ही तेलंगाना में मंदिरों की कमी हो गई थी। विभाजन के बाद दुनियाभर में प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर आंध्रप्रदेश के हिस्से में चला गया था। ऐसे में तेलंगाना सरकार ने इस कमी को पूरा करने के लिए 1800 करोड़ रुपए की लागत से एक महत्वपूर्ण स्थान, यदाद्री लक्ष्मी-नरसिम्हा मंदिर को भव्य रूप दिया है। यह मंदिर यदाद्रीगिरीगुट्टा के नाम से भी प्रसिद्द है। जानकारी के मुताबिक, इस साल के अंत तक तेलंगाना को भी अपना ‘तिरुपति मंदिर’…

तमिलनाडु में खुदाई में मिली 2600 साल पुरानी दीवार

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चैतन्य भारत न्यूज मदुरई. तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के किलाड़ी में केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की जा रही खुदाई में 2600 साल पुरानी संगम सभ्यता से जुड़ी एक दीवार मिली है। दीवार चार ईंटों से बनी है। केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा 2015 से यहां उत्खनन करवाया जा रहा है। वैगई नदी के तट पर स्थित इस गांव में चल रहे उत्खनन में अब तक कलाकृतियों समेत 14,500 वस्तुओं का पता लगा है। कार्बन डेटिंग (कार्बन क्षय द्वारा उम्र का पता लगाने की विधि) से पता चला है कि यह संगम…

खजराना गणेश मंदिर में मन्नत पूरी करने के लिए शास्त्रों के विपरीत काम करते हैं भक्त, 3 करोड़ का सोना पहनते हैं भगवान

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चैतन्य भारत न्यूज गणेश चतुर्थी की शुरुआत हो चुकी हैं। इस मौके पर हम आपको रोजाना भगवान गणेश के विश्वभर में प्रसिद्द कुछ खास मंदिरों के बारे में बताएंगे। इस कड़ी में हम आपको आज खजराना गणेश मंदिर के बारे में बता रहे हैं जो मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित है। यह मंदिर दुनियाभर के सबसे प्रसिद्द गणेश मंदिरों में से एक है। इस प्राचीन मंदिर का निर्माण अहिल्या बाई होल्कर ने कराया था। खजराना गणेश मंदिर में गणपति जी केवल सिंदूर से स्थापित किए गए हैं। मान्यता है…

प्रेम कहानी की याद में यहां दो गांव एक-दूसरे पर बरसाते हैं पत्थर, अब तक 13 लोगों की हुई मौत!

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चैतन्य भारत न्यूज छिंदवाड़ा. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सावरगांव और पांढुर्णा के बीच शनिवार को ऐसा युद्ध हुआ जिसमें दोनों तरफ से पत्थर ही पत्थर बरसे। पत्थरबाजी वाले इस युद्ध में खून-खराबा भी होता है। स्थानीय लोगोंं के लिए तो ये एक प्रथा है तो लेकिन अन्य लोग इसे कुप्रथा मानते हैंं। पांढुर्णा में हर साल पोला त्योहार के दूसरे दिन लगने वाले इस मेले का नाम ‘गोटमार मेला’ है। यह मेला जाम नदी के पास में लगता है। इस बार भी पुलिस और प्रशासन की तगड़ी सुरक्षा…

शाकाहारी मगरमच्छ करता है इस मंदिर की रखवाली, खाता है सिर्फ प्रसाद

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चैतन्य भारत न्यूज हमारा देश कई रहस्यों और मान्यताओं से भरा है। यहां हर राज्य में कुछ ना कुछ ऐसा पाया जाता है जिसपर यकीन कर पाना मुश्किल होता है। हम आपको आज एक मंदिर के ऐसे चमत्कार के बारे में बता रहे हैं जिस पर आपको भी यकीन करना मुश्किल होगा। केरल के एक मंदिर की झील में ऐसा मगरमच्छ रहता है जो पूरी तरह से शाकाहारी है। जी हां… और इतना ही नहीं बल्कि वो मगरमच्छ मंदिर की रखवाली भी करता है। ये हैरान कर देने वाला मामला…

यहां फल और पत्थरों से खेला जाता है युद्ध, उत्तराखंड के देवीधुरा स्थित मंदिर में अनूठी परंपरा

चैतन्य भारत न्यूज देहरादून. उत्तराखंड के चंपावत जिले में देवीधुरा स्थित मां बाराही देवी के मैदान में फल, फूल और पत्थरों से युद्ध लड़ने की अनूठी परंपरा है। हर साल रक्षाबंधन के दिन इसका आयोजन किया जाता है। इसे  ‘बग्वाल’ कहा जाता है। गुरुवार को हुआ यह युद्ध करीब नौ मिनट चला। इसमें 122 योद्धा मामूली रूप से घायल हो गए। इसमें भक्त परंपरा के मुताबिक लोग आपस में पत्थरों से लड़ाई करते है। मान्यता है कि मंदिर में नर बलि की परंपरा थी जिसके बाद आधुनिक रूप में यह…