अन्य संस्कारों के साथ-साथ बच्चों को सिखाएं राष्ट्रधर्म के भी संस्कार

चैतन्य भारत न्यूज बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं। उन्हें बचपन में जो भी संस्कार दिए जाते हैं और उन्हें जो दिशा दिखाई जाती है बच्चे जीवनभर उसी ओर चलते हैं। बच्चों को अच्छे संस्कार देने के साथ ही उन्हें राष्ट्रधर्म के संस्कार भी दिए जाने चाहिए। उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने का काम सिर्फ स्कूल में ही नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि अपनी मातृभूमि के लिए सम्मान और देश के प्रति स्वाभिमान की सोच की प्रेरणा बच्चों को घर पर भी सिखाना चाहिए। बच्चा चाहे किसी भी धर्म में…

गुजरात हाईकोर्ट का आदेश- मॉल व अन्य व्यावसायिक संस्थान नहीं वसूल सकते पार्किंग शुल्क

चैतन्य भारत न्यूज अहमदाबाद. कानूनी प्रावधानों के तहत मॉल-मल्टीप्लेक्स में आने वाले लोगों से पार्किंग शुल्क वसूलने का कोई अधिकार नहीं है। इसी अधिकार का हक जनता को दिलाते हुए गुजरात हाई कोर्ट ने कहा कि, ‘मॉल तथा अन्य निजी व्यावसायिक संस्थान पार्किंग शुल्क नहीं वसूल सकते।’ कार्यकारी मुख्य न्यायधीश अनंत एस. दवे और न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव की खंडपीठ के समक्ष पेश किए गए शपथपत्र में दोनों प्रतिवादियों ने कहा कि, ‘मॉल का निर्माण व्यापार संबंधी परिभाषा के तहत है। इसलिए कॉमर्शियल पार्किंग सहित 20 फीसदी पार्किंग यहां आने वाले लोगों के…

बच्चों को मत समझिए नादान, उनके भी हैं कई अधिकार, जानिए क्या

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चैतन्य भारत न्यूज आपने मानव अधिकारों के बारे में तो जरूर सुना या पढ़ा होगा लेकिन बच्चों के अधिकार के बारे में बहुत कम ही बार सुनने में आता है। सरकार ने बच्चों के लिए भी कुछ अधिकार बनाए हैं जिनका पालन करना सभी का कर्त्तव्य है। संयुक्त राष्ट्र (यूनाइटेड नेशंस) द्वारा जारी चाइल्ड राइट्स कंवेनशन पर भारत सहित सभी देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारतीय संविधान और राइट टू एजुकेशन जैसे अधिकारों ने बच्चों के हितों और हकों की हिफाजत के लिए बहुत-से दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत…

जानें महिला अधिकारों की रक्षा करने वाले संबंधित कानून

टीम चैतन्य भारत। भारतीय समाज में नारी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है, समाज के लिये नारी आधारभूत नींव से कम नहीं है। उनके त्याग, बलिदान और सर्वस्व समर्पण कर देने की स्वाहुत भावना ने मानव संस्कृति को आगे बढ़ाया है। इस भाव के प्रति सम्मान रखते हुए भारतीय संस्कृति ने निम्न श्लोक के माध्यम से स्त्रियों के प्रति समाज को उचित दृष्टिकोण दिया है। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।। अर्थात जिस घर में स्त्री का सदैव आदर-सम्मान होता है, उनकी आवश्यकताओं-अपेक्षाओं की पूर्ति…