सीबीआई-पुलिस अफसरों का विवाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना जारी

चैतन्य भारत न्यूज।
सीबीआई और पश्चिम बंगाल पुलिस के रविवार शाम हुए विवाद के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ शुरू हुआ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना जारी है। इस बीच उन्हें कई भाजपा विरोधी पार्टियों का समर्थन मिला है। कई नेता उनके साथ धरने पर बैठे भी।

गौरतलब है कि सीबीआई रविवार शाम शारदा और रोज वैली चिटफंड घोटाले को लेकर कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने पहुंची। सीबीआई की 40 लोगों की टीम में से 5 अधिकारियों को कोलकाता पुलिस अपने साथ ले गई। जिसके बाद वे ढाई घंटे तक थाने में रहे। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इसके पीछे कोलकाता पुलिस ने तर्क दिया कि सीबीआई के पास पूछताछ के लिए जरूरी कागजात (वारंट) नहीं थे। इसे केंद्र की मोदी सरकार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच खुले टकराव के रूप में देखा जा रहा है।

यही वजह है कि सीबीआई की इस कार्रवाई के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रविवार रात 9:30 बजे धरने पर बैठ गईं। ममता ने इसे सत्याग्रह का नाम दिया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, महाराष्ट्र नवरनिर्माण सेना के राज ठाकरे समेत 9 विपक्षी दलों के नेताओं ने ममता का समर्थन किया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले में ममता बनर्जी से फोन पर बात की। विवाद को लेकर सोमवार को राज्यसभा और लोकसभा में हंगामा हुआ। जिसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित कर दी गई।

क्या है रोज वैली घोटाला…
रोज वैली घोटाले पर काफी वक्त से तनातनी चल रही है। इसमें कई बड़े नेताओं का नाम भी शामिल होने की बात सामने आ चुकी है। जानकारी के मुताबिक लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाकर चूना लगाने वाले इस समूह की पहुंच राजनीति, रियल एस्टेट और फिल्म जगत में थी। दरअसल, इस घोटाले में रोज वैली ग्रुप ने लोगों को अलग-अलग स्कीम में धन लगाने का लालच दिया और बेहतर रिटर्न के सपने दिखाए। इस तरह करीब एक लाख निवेशकों को करोड़ों का चूना लगा दिया। आशीर्वाद और होलिडे मेंबरशिप स्कीम के नाम पर ग्रुप ने लोगों को ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया था। ग्रुप के एमडी शिवमय दत्ता इस घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जाते हैं।

क्या है शारदा चिटफंड घोटाला
पश्चिम बंगाल की शारदा चिटफंड कंपनी ने लालच दिया कि सागौन से जुड़े बॉन्ड्स में निवेश कर 34 गुना ज्यादा रिटर्न हासिल किया जा सकेगा। इसके लिए 25 साल का लॉकिंग पीरियड बताया गया था, जैसे, अगर आप 1 लाख रुपए का निवेश करते हैं तो 25 साल बाद आपको 34 लाख रुपए मिलते, जो कि बस लोगों को लालच देकर ठगी करने का पैंतरा था। वहीं आलू के बिजनेस में 15 महीनों के भीतर ही रकम डबल करने का सपना भी इस ग्रुप ने दिखाया। लालच में आकर 10 लाख लोगों ने निवेश किया और आखिर में कंपनी पैसों के साथ फरार हो गई। इस घोटाले की जांच के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं और सीबीआई इसकी जांच कर रही है।

 

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