फेक न्यूज चलाने वाली न्यूज वेबसाइट्स और अश्लीलता परोसने वाले ओटीटी प्लेटफार्म पर कार्रवाई के नियम बनाने की तैयारी

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने न्यूज वेबसाइट पर उपलब्ध न्यूज और समसामयिक विषयों पर सामग्री देने वाले कंटेट प्रोवाइडर व अश्लीलता परोसने वाले ओटीटी प्लेटफार्म पर शिकंजा कसने की तैयारी पर है। इन्हें एक आदेश जारी कर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दायरे में ला दिया गया है। मंत्रालय को अब इन्हें नियंत्रित करने के लिए नीतियां और नियम बनाने के अधिकार भी दे दिए हैं। दरअसल, इस आशय का आश्वासन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ओटीटी और ऑनलाइन कंटेंट को निगरानी- नियमन के अधीन लाने के लिए दिया था। अब तक, देश में डिजिटल सामग्री को नियंत्रित करने के लिए कोई कानून या एजेंसी भी नहीं है।

एक अनुमान के मुताबिक मार्च 2019 के अंत तक भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म का करोबार करीब पांच सौ करोड़ रुपए का था। अगले पांच साल में यह चार हजार करोड़ रुपए तक हो सकता है। दरअसल, देश में प्रिंट मीडिया यानी अखबार और पत्रिकाओं की निगरानी के लिए प्रेस काउंसिल, टीवी न्यूज चैनलों के लिए एनबीए, विज्ञापनों के लिए एएससीआई और फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड है लेकिन डिजिटल कंटेट की निगरानी के लिए कोई संस्था नहीं है। इसकी निगरानी के लिए नियम तय करने केंद्र ने दस सदस्यों की एक समिति बनाई थी।

इसमें केंद्रीय सचिव के अलावा पीसीआई, एनबीए और आईबीए के प्रतिनिधि थे। मंत्रालय के एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि टीवी न्यूज चैनलों के कंटेट कोड की तर्ज पर ही ऑनलाइन कंटेट का कोड बनेगा। यह भी संभव है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर में ऑनलाइन कंटेट मॉनिटरिंग विंग बन जाए। यह शिकायत लंबे समय से मिल रही थी कि कुछ पोर्टल झूठी यानी फेक खबरें प्रकाशित कर देते हैं। कई मामलों में इससे अपराध व दंगों को बढ़ावा मिलता है इसलिए समसामयिक विषयों या करंट अफेयर्स से जुड़ा हर ऑनलाइन कंटेट निगरानी के दायरे में होगा। ऐसा ही ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों और सीरियल्स के लिए भी होगा। उन्हें प्रमाण पत्र लेना होगा। किस उम्र के लोग कौन सी फिल्म देख पाएंगे, इसका पैमाना भी बनेगा। अश्लील व आपत्तिजनक दृश्य हटाए जा सकेंगे।

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