ओबीसी वर्ग को आज मिलेगा बड़ा तोहफा, लोकसभा में पेश होगा आरक्षण से जुड़ा बिल, विपक्ष भी सरकार के साथ

चैतन्य भारत न्यूज

हंगामे और शोर-शराबे के बीच चल रहे संसद के मॉनसून सत्र का आखिरी हफ्ता शुरू हो गया है। इस दौरान मोदी सरकार अहम बिल पास करवाने की कोशिश कर रही है और इनमें सबसे ऊपर ओबीसी आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक है। केंद्र सरकार इस विधेयक को सोमवार को लोकसभा में पेश करेगी और अब विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी ऐलान किया है कि वह इस बिल के समर्थन में है। अगर बिल पास हो जाता है तो एक बार फिर से राज्यों को ओबीसी सूची में किसी जाति को अधिसूचित करने का अधिकार मिल जाएगा।

दरअसल, मॉनसून सत्र के आखिरी सप्ताह के पहले दिन ही सरकार कई अहम कार्य निपटाने की तैयारी में है। सोमवार को सरकार राज्यों को ओबीसी सूची बनाने का अधिकार देने वाला 127वां संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी। हालांकि, पेगासस सहित अन्य मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा जारी रहने की संभावना है। बावजूद इसके इस विधेयक को पारित करने में ज्यादा अड़चन नहीं आएगी, क्योंकि कोई राजनीतिक दल आरक्षण संबंधी विधेयक का विरोध नहीं करेगा।

127वां संविधान संशोधन बिल के द्वारा आर्टिकल 342 A (3) लागू किया जाएगा, जिसके जरिए राज्य सरकारों को ये अधिकार होगा कि वह अपने हिसाब से ओबीसी समुदाय की लिस्ट तैयार कर सकें। संशोधित बिल के पारित होने के बाद राज्यों को इसके लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना होगा।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय कैबिनेट ने इस संविधान संशोधन बिल पर मुहर लगाई थी। लोकसभा और राज्यसभा में बिल पारित होने के बाद इसे कानून का रूप दे दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद आ रहा बिल

केंद्र सरकार द्वारा ये संविधान संशोधन बिल इसलिए लाया जा रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मई में एक टिप्पणी की थी। जिसमें कहा था कि केवल केंद्र को ये अधिकार है कि वह ओबीसी समुदाय से जुड़ी लिस्ट तैयार कर सके। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इसपर आपत्ति जाहिर की गई थी, इसी के बाद अब केंद्र सरकार संविधान संशोधन बिल लाकर इसे कानूनी रूप देना चाहती है।

अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं, जहां पर ओबीसी समुदाय का चुनावी गणित पर बड़ा असर है। ऐसे में केंद्र के इस फैसले को ओबीसी समुदाय के लुभाने के तौर पर भी देखा जा रहा है। हाल ही में मेडिकल एजुकेशन की रिजर्व सीटों में केंद्र ने ओबीसी समुदाय और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के लिए सीटें आरक्षित की थीं।

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