पितरों की तिथि है चैत्र अमावस्या, जानिए व्रत का महत्व और पूजा-विधि

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में चैत्र मास की अमावस्या को काफी महत्व है। चैत्र अमावस्या वह तिथि है जो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम तिथि भी कहलाती है। इस तिथि के बाद हिंदू नववर्ष शुरु हो जाता है। इस बार चैत्र अमावस्या 12 अप्रैल को पड़ रही है। आइए जानते हैं चैत्र अमावस्या का महत्व और पूजा-विधि।



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चैत्र अमावस्या का महत्व

चैत्र माह में कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या को चैत्र अमावस्या नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस अमावस्या पर पितर अपने वंशजों से मिलने धरती पर आते हैं। इस दिन व्रत रखकर पवित्र नदी में स्नान कर पितरों के निमित्त तर्पण और दान किया जाए तो वे प्रसन्न हो जाते हैं। इस दिन व्रत करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। कहा जाता है कि अमावस्या तिथि पर सूरज-चंद्रमा एक साथ होते हैं। इसी वजह से यह दिन पितरों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

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चैत्र अमावस्या की पूजा-विधि

  • चैत्र अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, जलाशय या कुंड में स्नान करें।
  • सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित जरूर करें।
  • इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत भी रखते हैं।
  • इसके बाद अपने पितरों को याद करते हुए उनके नाम पर ब्राह्मणों को खाना खिलाएं।
  • वहीं पितरों के स्थान पर देसी घी का दीप जलाए।
  • इसके बाद ब्राह्मण भोजन कराने के बाद प्रसाद के रूप में परिवार के साथ ग्रहण करें।
  • इस दिन मौन व्रत रहने सर्वश्रेष्ठ फल मिलता है।

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