आज से शुरू हुई चैत्र नवरात्रि, जानिए व्रत का महत्व, पूजा-विधि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का बहुत महत्व है। इस बार चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू होकर 22 अप्रैल तक रहेंगे। नवरात्रि के नौ दिन लगातार मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाएगी। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि व्रत का महत्व और पूजा-विधि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त।



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चैत्र नवरात्रि व्रत का महत्व

साल में चार बार नवरात्रि आती है। आषाढ़ और माघ में आने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्र होते हैं जबकि चैत्र और अश्विन प्रगट नवरात्रि होती हैं। चैत्र के ये नवरात्र पहले प्रगट नवरात्र होते हैं। चैत्र नवरात्र से हिंदू वर्ष की शुरुआत भी होती है। वहीं शारदीय नवरात्र के दौरान दशहरा मनाया जाता है।  नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है। इस दौरान लोग देवी के नौ रूपों की आराधना कर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। मान्‍यता है कि इन नौ दिनों में जो भी सच्‍चे मन से मां दुर्गा की पूजा करता है उसकी सभी इच्‍छाएं पूर्ण होती हैं।

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चैत्र नवरात्रि पूजा-विधि

  • चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा से पहले साधक को स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर गंगाजल डालकर उसे शुद्ध करना चाहिए और उस पर लाल रंग का वस्त्र बिछाना चाहिए।
  • इसके बाद चावल का अष्टदल कमल बनाएं और मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • मूर्ति स्थापित करने के बाद अष्टदल कमल पर कलश स्थापित करें और उस पर मौली बांधे।
  • इसके साथ ही कलश पर भी तिलक करें और अखंड दीपक प्रज्वल्लित करें फिर फूल से जल लेकर प्रतिमा और कलश पर जल छिड़कें।

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कलश स्थापना शुभ मुहूर्त और पूजा विधि 

  • नवरात्रि पूजा में कलश स्थापना और कन्या पूजा का विशेष महत्व होता है।
  • मिट्टी से बनाए गए वेदी पर कलश स्थापना की जाती है।
  • वेदी पर जौ और गेंहू बो दें और उस पर मिट्टी या तांबे का कलश विधिपूर्वक स्थापित कर दें।
  • इसके बाद वहां गणेश जी, नौ ग्रह, आदि को स्थापित करें तथा कलश पर मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें।
  • इसके बाद आप श्रीदुर्गासप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
  • अब आप प्रत्येक दिन के आधार पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों रोज विधि-विधान से पूजा करें।

शुभ मुहूर्त

कलश की स्थापना चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है। इस बार प्रतिपदा तिथि 25 मार्च को है, लेकिन प्रतिपदा सायं 05.26 तक ही है  इसलिए कलश की स्थापना सायं 05. 26 के पहले कर ली जाएगी।

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