आखिर क्यों गरीब बच्चों को ही अपनी चपेट में ले रहा है ‘चमकी बुखार’? ये हो सकती हैं वजहें

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चैतन्य भारत न्यूज

बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार यानी इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या 113 तक पहुंच गई है। यह सिलसिला अब भी थमा नहीं है। चमकी बुखार ने अब तक कई गरीबों के घर के चिराग को बुझा दिए हैं।

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बिहार के मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के कई इलाकों में यह रोग कई सालों से फैला हुआ। बता दें चमकी बुखार का अब तक कोई इलाज नहीं मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक चमकी बुखार का शिकार सिर्फ गरीब परिवार के बच्चें ही हुए हैं। तो क्या यह कहना सही होगा कि चमकी बुखार अमीर और गरीब में फर्क देखकर बच्चों को अपना शिकार बना रहा है? दरअसल, इस बीमारी का मुख्य कारण गर्मी, गंदगी, अज्ञानता, कुपोषण और सही समय पर इलाज न मिलना बताया जा रहा है। यह भी सामने आया है कि गरीब परिवार के बच्चे बिना कुछ खाए सुबह या फिर रात को सिर्फ लीची का सेवन करके सो जाते हैं। इसलिए लीची उनकी सेहत के लिए खतरा बन जाती है।

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बता दें सुबह उठते ही खाली पेट लीची का सेवन करना जानलेवा साबित हो सकता है। दरअसल, खाली पेट लीची का सेवन करने से उसमें मौजूद ‘हाइपोग्लायसिन ए’ और ‘मेथिलीन सायक्लोप्रोपाइल ग्लायसीन’ नामक तत्व व्यक्ति का ब्लड शुगर बहुत अधिक घटा देते हैं। गौरतलब है कि, चमकी बुखार का असर बिहार के मुजफ्फरपुर के अलावा तिरहुत, चंपारण, मुसहरी, कांटी, मीनापुर और मोतीपुर जैसे इलाकों में अधिक दिखाई दे रहा है। ये सभी वो इलाके हैं जहां गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों का बसेरा है।

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