चमकी बुखार से अब तक 100 बच्चों की मौत, तीन मासूमों ने स्वास्थ्य मंत्री के सामने तोड़ा दम, जानिए क्या है इस बुखार के लक्षण

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चैतन्य भारत न्यूज

पटना. बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। रोजाना चमकी बुखार से पीड़ित कई बच्चों के मरने की खबरें आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बुखार से मरने वालों की संख्या बढ़कर 100 तक पहुंच गई है।

चमकी बुखार का सबसे ज्यादा कहर सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी, बेतिया और वैशाली जिले में देखने को मिल रहा है। मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल अस्पताल में चमकी बुखार से पीड़ित 375 बच्चे भर्ती हैं। चमकी बुखार से पीड़ित सबसे ज्यादा मासूमों की मौतें एसकेएमसीएच अस्पताल में हुई हैं। पिछले कई दिनों से परिजन लगातार अपने बच्चों के इलाज के लिए इस अस्पताल में पहुंच रहे हैं।

अब तक डॉक्टर भी इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं कि आखिर यह गंभीर बीमारी इतनी कैसे फैल रही है। चमकी बुखार के रोकथाम को लेकर जो भी प्रयास किए जा रहे हैं वो सभी नाकाम साबित हो रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन अपनी पूरी टीम के साथ रविवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे। हर्षवर्धन के सामने ही तीन मासूम बच्चों ने दम तोड़ दिया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बीमारी से मरने वाले बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया है।

हर्षवर्धन ने कहा कि, ‘इस बीमारी की पहचान करने के लिए शोध होना चाहिए। चमकी बुखार के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय संगठनों को साथ मिलकर काम करना चाहिए। प्रभावित इलाकों के सभी बच्चों का टीकाकरण किया जाना चाहिए। साथ ही लोगों को बीमारी के बारे में जागरूक करने की भी जरूरत है।’ स्वास्थ्य मंत्री ने इस बीमारी का उचित उपचार और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए राज्य को वित्तीय मदद प्रदान करने को कहा है।

चमकी बुखार और इसके लक्षण

यह बेहद गंभीर बीमारी है जिसका इलाज समय रहते होना चाहिए।  1 से 15 साल की उम्र के बच्‍चे इस बीमारी से ज्‍यादा प्रभावित हैं। चमकी बुखार होने पर पीड़ित को तेज बुखार आता है साथ ही पूरे शरीर या किसी खास अंग में ऐंठन होना शुरू हो जाती है। इस बुखार से पीड़ित बच्चा सुस्त होने लगता है और उसे बेहोशी भी आती है। इसमें चिमटी काटने पर भी शरीर में कोई हरकत नहीं होती है। जैसे ही किसी बच्चे में ये सभी लक्षण दिखे तो उसे तुरंत ही अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं।

चमकी बुखार से बचने के लिए ये सावधानियां बरते-

बच्चों को धूप में जाने से रोके।
हो सके तो बच्चों को दिन में दो बार नहलाएं।
गर्मी के दिनों में बच्चोंं को ओआरएस अथवा नींबू-पानी-चीनी का घोल पिलाएं।
रात में उन्हें भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं।
बच्चेे को खाली पेट लीची न खिलाएं। साथ ही कच्ची लीची को खाने से बचें।

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